SME IPOs में कुछ ही निवेशकों का दबदबा: क्या SEBI का शिकंजा कसेगा?

SME IPOs में कुछ ही निवेशकों का दबदबा: क्या SEBI का शिकंजा कसेगा?



इस साल 2025 में SME IPO बाज़ार में एक बड़ा ट्रेंड देखने को मिला है—कुछ चुनिंदा एंकर निवेशकों का दबदबा। प्राइम डेटाबेस के आँकड़ों के मुताबिक, इस साल अब तक आए 106 SME IPOs में से लगभग 30% एंकर बुक में सिर्फ तीन निवेशकों का बोलबाला रहा। यह स्थिति न सिर्फ चौंकाने वाली है, बल्कि इसने बाज़ार नियामक SEBI की भी चिंता बढ़ा दी है।

चुनिंदा निवेशकों की मनमानी

आमतौर पर IPO से पहले एंकर निवेशकों को शेयर अलॉट किए जाते हैं, जिससे बाज़ार में एक सकारात्मक माहौल बनता है। लेकिन इस साल, छोटे और मंझले उद्यमों (SMEs) के IPOs में यह प्रथा एक अलग ही रूप ले चुकी है। आँकड़े बताते हैं कि विकासा कैपिटल, राजस्थान ग्लोबल सिक्योरिटीज, और सेंट कैपिटल फंड जैसे कुछ ही संस्थागत निवेशकों ने मिलकर करीब ₹1,522 करोड़ के एंकर बुक का बड़ा हिस्सा हथिया लिया।


विकासा कैपिटल ने 34 SME IPOs में,

राजस्थान ग्लोबल सिक्योरिटीज ने 32 में,

और सेंट कैपिटल फंड ने 30 IPOs में हिस्सेदारी हासिल की।

इन तीनों ने मिलकर इस साल के SME IPOs के लगभग 30% एंकर बुक को कवर किया। यह एकाधिकार की स्थिति बाज़ार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के लिए अच्छी नहीं मानी जाती।

SEBI की नज़र में क्यों है यह समस्या?

यह पैटर्न कई कारणों से चिंता का विषय बन गया है। जब कुछ ही निवेशक किसी IPO में बड़ा हिस्सा लेते हैं, तो वे लिस्टिंग के बाद शेयर की कीमतों में हेरफेर कर सकते हैं। हाल के दिनों में कई SME IPOs में असामान्य रूप से उच्च सब्सक्रिप्शन और शानदार लिस्टिंग गेन देखने को मिले, जिसके बाद शेयरों की कीमतों में तेज़ी से गिरावट आई। इस तरह की अस्थिरता छोटे निवेशकों के लिए जोखिम बढ़ाती है।


SEBI के अधिकारी पहले ही इस बात पर चिंता जता चुके हैं और उन्होंने BSE और NSE के साथ मिलकर SME IPOs के नियमों को सख्त कर दिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि IPOs का आवंटन अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष हो, और मुट्ठीभर निवेशकों का एकाधिकार खत्म हो।


यह देखना दिलचस्प होगा कि SEBI के नए नियम किस तरह से इस पैटर्न को बदल पाते हैं और क्या आने वाले समय में SME IPOs में एंकर निवेशकों की विविधता बढ़ेगी। बाज़ार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और छोटे निवेशकों के हितों की सुरक्षा के लिए यह एक ज़रूरी कदम है।

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