'किडनैपिंग' की कहानी गढ़कर निवेशकों को ठगा, SEBI ने पर्दाफाश कर ₹48 करोड़ वसूलने का दिया आदेश
'किडनैपिंग' की कहानी गढ़कर निवेशकों को ठगा, SEBI ने पर्दाफाश कर ₹48 करोड़ वसूलने का दिया आदेश
शेयर बाजार का यह मामला किसी क्राइम थ्रिलर फिल्म की कहानी से कम नहीं है। मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने एक चौंकाने वाली घटना का पर्दाफाश किया है, जिसमें लॉजिस्टिक्स कंपनी सीकोस्ट शिपिंग सर्विसेज लिमिटेड (SSSL) और उसके प्रमोटर शामिल हैं। कंपनी पर आरोप था कि उसने निवेशकों से राइट्स इश्यू के जरिए जुटाई गई रकम का गलत इस्तेमाल किया, जिसके जवाब में उन्होंने एक ऐसी कहानी सुनाई जिस पर यकीन करना मुश्किल था।
'फिरौती' की झूठी कहानी और सेबी की जांच
जब सेबी ने कंपनी से फंड के इस्तेमाल का हिसाब मांगा, तो कंपनी ने एक सनसनीखेज दावा किया। उन्होंने कहा कि फंड का इस्तेमाल व्यापार के लिए नहीं हो पाया, क्योंकि प्रमोटर मनीष शाह के बेटे का अपहरण हो गया था, और यह पूरी रकम 'फिरौती' के रूप में दी गई थी।
लेकिन सेबी की जांच में यह कहानी पूरी तरह से फर्जी पाई गई। सेबी ने पाया कि कंपनी इस दावे के समर्थन में कोई भी ठोस सबूत, जैसे कि पुलिस शिकायत या कोई दस्तावेज, पेश नहीं कर पाई। सेबी ने अपने आदेश में कहा कि यह दावा "असामान्य और भरोसे के लायक नहीं" है।
विरोधाभासी बयानों ने खोली पोल
जांच के दौरान, कंपनी के प्रमोटरों के बयान भी लगातार बदलते रहे, जिसने सेबी के संदेह को और मजबूत कर दिया। खुद प्रमोटर मनीष शाह ने एक शपथपत्र में यह स्वीकार किया कि राइट्स इश्यू से मिले पैसे फिरौती में नहीं बल्कि "फर्जी खरीदारी" में इस्तेमाल किए गए थे, जो उनकी ही पहले की कहानी के खिलाफ था। इन विरोधाभासी और उलझे हुए बयानों को देखते हुए सेबी ने किडनैपिंग की कहानी को पूरी तरह से खारिज कर दिया।
₹48 करोड़ की वसूली और 5 साल का बैन
इस धोखाधड़ी को देखते हुए सेबी ने सख्त कदम उठाए हैं। 24 सितंबर को जारी अपने आदेश में, सेबी ने न केवल कंपनी और उसके प्रमुख अधिकारियों को 1 से 5 साल के लिए शेयर मार्केट में ट्रेडिंग से प्रतिबंधित कर दिया, बल्कि उन पर ₹1.97 करोड़ का जुर्माना भी लगाया। सबसे महत्वपूर्ण बात, सेबी ने कंपनी की अवैध कमाई ₹47.89 करोड़ की वसूली का भी आदेश दिया है। सेबी का यह कदम निवेशकों को धोखा देने वालों के लिए एक कड़ा संदेश है।

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