REITs को मिला 'इक्विटी' का दर्जा, सेबी के फैसले से रियल एस्टेट सेक्टर को मिलेगा बड़ा बूस्ट

REITs को मिला 'इक्विटी' का दर्जा, सेबी के फैसले से रियल एस्टेट सेक्टर को मिलेगा बड़ा बूस्ट



भारतीय पूंजी बाज़ार के नियामक सेबी (SEBI) ने एक बड़ा फैसला लेते हुए रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (REITs) को 'इक्विटी' का दर्जा दे दिया है। यह कदम लंबे समय से प्रतीक्षित था और इससे रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश का नया द्वार खुल गया है। हालांकि, इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश ट्रस्ट (InvITs) को उनका पुराना 'हाइब्रिड' दर्जा ही बरकरार रखा गया है।


क्यों मिला REITs को इक्विटी का दर्जा?

सेबी ने कहा है कि REITs की प्रकृति इक्विटी के समान है और इनमें तरलता (liquidity) भी अधिक होती है। इस फैसले से म्यूचुअल फंड अब REITs में अपने इक्विटी पोर्टफोलियो की निवेश सीमा के भीतर निवेश कर सकेंगे। इसका सीधा मतलब है कि REITs में म्यूचुअल फंड योजनाओं द्वारा होने वाले निवेश में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है।


वहीं, InvITs को हाइब्रिड श्रेणी में रखा गया है क्योंकि वे मुख्य रूप से प्राइवेट प्लेसमेंट प्रोडक्ट होते हैं, जिनमें नकदी का प्रवाह स्थिर होता है लेकिन लिक्विडिटी कम होती है।


विशेषज्ञों की राय: गेम-चेंजर साबित होगा यह कदम

भारत के सबसे बड़े REIT, नॉलेज रियल्टी ट्रस्ट के सीईओ शिरीष गोडबोले ने सेबी के इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि यह रियल एस्टेट सेक्टर के लिए पूंजी जुटाने का एक अच्छा रास्ता खोलेगा। इससे न केवल भारत वैश्विक प्रथाओं के साथ तालमेल बिठा सकेगा, बल्कि यह सेक्टर घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के लिए और भी आकर्षक बन जाएगा।


गोडबोले ने कहा कि इस फैसले से इक्विटी इंडेक्सों और म्यूचुअल फंडों के जरिए रियल एस्टेट सेक्टर में निवेशकों की भागीदारी बढ़ेगी। इससे डेवलपर्स को पूंजी जुटाने की लागत में भी कमी आएगी।


अन्य महत्वपूर्ण फैसले

सेबी ने अपनी बैठक में अन्य महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए हैं:


रणनीतिक निवेशक की परिभाषा में बदलाव: REITs और InvITs के नियमों के तहत रणनीतिक निवेशक (Strategic Investor) की परिभाषा में बदलाव करके उन्हें योग्य संस्थागत खरीदार (QIB) के तहत लाया गया है।


स्टॉक एक्सचेंजों के लिए नए नियम: स्टॉक एक्सचेंजों के लिए दो कार्यकारी निदेशकों (Executive Directors) की नियुक्ति को अनिवार्य बनाया गया है, जिससे उनके गवर्नेंस फ्रेमवर्क में सुधार होगा।


यह कदम भारतीय पूंजी बाजार को और अधिक गहरा और मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों को फायदा मिलने की उम्मीद है।

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