इलेक्ट्रिक वाहनों पर GST की तलवार: टाटा मोटर्स और महिंद्रा के शेयर क्यों गिरे?

इलेक्ट्रिक वाहनों पर GST की तलवार: टाटा मोटर्स और महिंद्रा के शेयर क्यों गिरे?



मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में भले ही कई सेक्टरों में रौनक रही, लेकिन ऑटो सेक्टर के दिग्गज, टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M), को जोरदार झटका लगा। दोनों कंपनियों के शेयरों में गिरावट का कारण एक रिपोर्ट बनी, जिसमें इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) पर वस्तु एवं सेवा कर (GST) बढ़ाने का प्रस्ताव सामने आया है। इस खबर ने निवेशकों को चिंता में डाल दिया, जिससे इन प्रमुख ऑटो स्टॉक्स में बिकवाली देखने को मिली।


शेयरों पर क्या हुआ असर?

M&M के शेयरों में 2.33% की गिरावट दर्ज की गई और यह ₹3,238 पर बंद हुआ। वहीं, टाटा मोटर्स भी लगभग 1% गिरकर ₹684.30 पर आ गया। यह गिरावट उस रिपोर्ट के बाद आई जिसमें यह बताया गया कि एक टैक्स पैनल ने कुछ इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर GST की दर 5% से बढ़ाकर 18% करने का प्रस्ताव दिया है।


किस पर बढ़ेगा GST?

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, जीएसटी में बढ़ोतरी का यह प्रस्ताव सभी इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर लागू नहीं होगा। यह मुख्यतः उन EVs पर होगा जिनकी कीमत ₹20 लाख से ₹40 लाख के बीच है। ₹40 लाख से ऊपर की कीमत वाली लग्जरी इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर तो 28% तक GST लगाने की सिफारिश की गई है। पैनल का तर्क है कि महंगी गाड़ियां 'अपर क्लास' के लिए हैं और इन्हें अक्सर आयात किया जाता है, इसलिए इन पर अधिक टैक्स लगना चाहिए।


GST काउंसिल की बैठक पर टिकी निगाहें

यह सब इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 3 और 4 सितंबर को जीएसटी काउंसिल की एक अहम बैठक होने वाली है। इस बैठक में संभावित जीएसटी सुधारों पर चर्चा होगी। सरकार पहले ही 28% जीएसटी स्लैब को खत्म करने और एक सरल टैक्स स्ट्रक्चर लाने पर विचार कर रही है। कुछ सूत्रों के अनुसार, काउंसिल कुछ लग्जरी वस्तुओं को एक नई 40% की श्रेणी में भी रख सकती है।


किस पर पड़ेगा ज्यादा असर?

अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो इसका सबसे ज्यादा असर टेस्ला, BYD, मर्सिडीज और बीएमडब्ल्यू जैसी कंपनियों पर पड़ेगा, जो भारत में लग्जरी इलेक्ट्रिक गाड़ियां बेचती हैं। टाटा मोटर्स और M&M जैसी घरेलू कंपनियों के लिए चिंता कम है, क्योंकि इनका लग्जरी सेगमेंट में सीमित पोर्टफोलियो है।


भारत के EV बाजार में टाटा मोटर्स 40% की हिस्सेदारी के साथ लीडर है, जबकि M&M की हिस्सेदारी 18% है। ऐसे में, यह देखना दिलचस्प होगा कि जीएसटी काउंसिल की बैठक में क्या फैसला होता है और उसका असर इन कंपनियों के भविष्य और भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन बाजार पर क्या पड़ता है।

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