इंफोसिस का अब तक का सबसे बड़ा बायबैक: ₹18,000 करोड़ के प्रोग्राम में क्या आपको हिस्सा लेना चाहिए?
इंफोसिस का अब तक का सबसे बड़ा बायबैक: ₹18,000 करोड़ के प्रोग्राम में क्या आपको हिस्सा लेना चाहिए?
भारतीय आईटी दिग्गज इंफोसिस ने ₹18,000 करोड़ के एक मेगा शेयर बायबैक प्रोग्राम की घोषणा की है, जो कंपनी के इतिहास का सबसे बड़ा बायबैक है। इस प्रोग्राम के तहत कंपनी निवेशकों से ₹1800 प्रति शेयर की कीमत पर शेयर वापस खरीदेगी, जो 12 सितंबर के क्लोजिंग प्राइस से लगभग 18% अधिक है।
हालांकि, इस घोषणा के बावजूद 15 सितंबर को इंफोसिस के शेयरों में गिरावट देखी गई, और इसके पीछे मुख्य कारण टैक्स के नए नियम बताए जा रहे हैं।
क्यों घट गया बायबैक का आकर्षण?
पहले, 1 अक्टूबर, 2024 से पहले शेयर बायबैक पर लगने वाले टैक्स का भुगतान कंपनी करती थी, जिससे निवेशकों को इसका सीधा लाभ मिलता था। लेकिन, यूनियन बजट 2024 के बाद नियमों में बड़ा बदलाव हुआ। अब बायबैक से होने वाले मुनाफे पर निवेशक को खुद टैक्स चुकाना होता है। इस मुनाफे को 'अन्य स्रोतों से आय' माना जाता है, जिससे यह निवेशक के इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स योग्य हो जाता है।
एसबीआई सिक्योरिटीज के सनी अग्रवाल का कहना है कि नए टैक्स नियमों के कारण बायबैक अब उतना आकर्षक नहीं रह गया है, खासकर उन निवेशकों के लिए जो उच्च टैक्स स्लैब में आते हैं। रेलिगेयर ब्रोकिंग के अजीत मिश्रा का भी मानना है कि बायबैक में भाग लेने का फैसला पूरी तरह से निवेशक के टैक्स स्लैब पर निर्भर करता है।
किन निवेशकों को होगा फायदा?
विशेषज्ञों के मुताबिक, कम टैक्स स्लैब में आने वाले निवेशकों या टैक्स से पूरी तरह छूट वाले निवेशकों को ही इस बायबैक में भाग लेने से फायदा हो सकता है। ऐसे निवेशकों के लिए, एक अच्छा एक्सेप्टेंस रेशियो (यानी, जितने शेयर बायबैक के लिए दिए गए, उनमें से कंपनी ने कितने स्वीकार किए) महत्वपूर्ण होगा।
यह स्पष्ट है कि जहां एक ओर ₹1800 प्रति शेयर का प्रीमियम निवेशकों को आकर्षित कर रहा है, वहीं दूसरी ओर नए टैक्स नियम ने बायबैक में भाग लेने के फैसले को थोड़ा जटिल बना दिया है। निवेशकों को अपने व्यक्तिगत टैक्स स्थिति के आधार पर ही कोई निर्णय लेना चाहिए।

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