वेदांता का ₹17,000 करोड़ का दाँव, नुवामा को क्यों नहीं आया पसंद?

वेदांता का ₹17,000 करोड़ का दाँव, नुवामा को क्यों नहीं आया पसंद?



अनिल अग्रवाल की माइनिंग दिग्गज, वेदांता (Vedanta), ने कर्ज में डूबी जयप्रकाश एसोसिएट्स (Jaiprakash Associates) के लिए ₹17,000 करोड़ की सफल बोली लगाकर गौतम अदाणी के ग्रुप को पीछे छोड़ दिया। यह खबर कंपनी के शेयरधारकों के लिए एक बड़ी जीत की तरह लग रही थी, लेकिन ब्रोकरेज फर्म नुवामा (Nuvama) ने इस पर अपनी नकारात्मक राय जाहिर की है। नुवामा के मुताबिक, यह कदम कंपनी के माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स के लिए नकारात्मक साबित हो सकता है।


नुवामा की चिंताएँ: कर्ज का बोझ और नया कारोबार

नुवामा ने वेदांता के इस कदम पर सवाल उठाते हुए कहा है कि कंपनी को अभी अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट करनी चाहिए। उनकी मुख्य चिंता यह है कि जब वेदांता ग्रुप का पहला और सबसे महत्वपूर्ण काम अपने भारी कर्ज को कम करना होना चाहिए, तब वह एक बिल्कुल ही नए कारोबार (रियल एस्टेट, सीमेंट) में प्रवेश कर रही है।


इसके अलावा, नुवामा का मानना है कि ₹17,000 करोड़ जैसी बड़ी रकम की फंडिंग जुटाना वेदांता के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होगा। इस वजह से, ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि इस डील के बाद वेदांता के शेयरों की रेटिंग में सुधार की संभावना कम हो गई है। यह उन 20 लाख से अधिक छोटे निवेशकों के लिए चिंता का विषय है, जिनकी कंपनी में 11.64% की हिस्सेदारी है।


जयप्रकाश एसोसिएट्स पर कर्ज का पहाड़

जयप्रकाश एसोसिएट्स पर इस समय ₹59,000 करोड़ से अधिक का कर्ज है। कंपनी को दिवालिया प्रक्रिया (IBC) में लाया गया था। आखिरी दौर में सिर्फ वेदांता और अदाणी ग्रुप ही बोली में बचे थे। वेदांता ने ₹17,000 करोड़ की बोली लगाकर यह दौड़ जीत ली। हालांकि, अन्य बोलीदाताओं, जैसे डालमिया भारत और जिंदल पावर, ने अंतिम चरण में हिस्सा नहीं लिया।


जयप्रकाश एसोसिएट्स के पास कई बड़ी संपत्तियां हैं, जिनमें रियल एस्टेट, सीमेंट प्लांट और पावर प्रोजेक्ट शामिल हैं। बोली लगाने वाली कंपनियों को यह भी आश्वासन देना था कि अगर जमीन से जुड़े विवादों का फैसला कंपनी के पक्ष में आता है तो वे अतिरिक्त राशि का भुगतान करेंगे।


वेदांता का यह कदम कंपनी की रणनीति में एक बड़ा बदलाव है। जहाँ कुछ विश्लेषक इसे विस्तार के लिए एक साहसिक कदम मान रहे हैं, वहीं नुवामा जैसे ब्रोकरेज फर्म इसे कंपनी के लिए एक जोखिम भरा दाँव मान रहे हैं, जो खासकर छोटे निवेशकों के लिए फायदेमंद नहीं होगा।

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