Ola Electric को झटका: Q1 में ₹428 करोड़ का शुद्ध घाटा, रेवेन्यू में 50% की गिरावट! तो फिर शेयर 16% क्यों उछला?

Ola Electric को झटका: Q1 में ₹428 करोड़ का शुद्ध घाटा, रेवेन्यू में 50% की गिरावट! तो फिर शेयर 16% क्यों उछला?


ओला इलेक्ट्रिक (Ola Electric) के लिए मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) चुनौतीपूर्ण रही है। कंपनी का शुद्ध घाटा बढ़कर ₹428 करोड़ पर पहुँच गया है, जो एक साल पहले इसी तिमाही में ₹347 करोड़ था। सोमवार, 14 जुलाई को जारी नतीजों के अनुसार, कंपनी के रेवेन्यू में भी सालाना आधार पर 49.6 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई, जो ₹1,644 करोड़ से घटकर ₹828 करोड़ रह गया।


घाटे और गिरावट के बावजूद शेयर में उछाल क्यों?

इन निराशाजनक आंकड़ों के बावजूद, ओला इलेक्ट्रिक के शेयरों में तिमाही नतीजों के बाद 16% तक की जोरदार उछाल देखने को मिली, और इसका भाव ₹43.57 तक पहुँच गया। दोपहर 12:39 बजे के करीब, कंपनी के शेयर 15.48 फीसदी की तेजी के साथ ₹46 के भाव पर कारोबार कर रहे थे। हालांकि, इस तेजी के बावजूद इस साल अब तक कंपनी के शेयरों में करीब 47 फीसदी की गिरावट आ चुकी है।


शेयरों में इस उछाल के पीछे मुख्य वजह कंपनी द्वारा पूरे वित्त वर्ष 2026 के लिए जारी किए गए सकारात्मक अनुमान हैं:


रेवेन्यू ग्रोथ अनुमान: कंपनी ने पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान अपने रेवेन्यू के ₹4,200 करोड़ से ₹4,700 करोड़ के बीच रहने का अनुमान जताया है। अगर यह अनुमान सही साबित होता है, तो यह वित्त वर्ष 2025 की तुलना में एक महत्वपूर्ण रेवेन्यू ग्रोथ होगी।


वॉल्यूम अनुमान: ओला इलेक्ट्रिक ने अपने वॉल्यूम्स के 3.25 से 3.75 लाख यूनिट्स के करीब रहने का अनुमान जताया है।


ग्रॉस मार्जिन अनुमान: कंपनी का अनुमान है कि उसका ग्रॉस मार्जिन 35% से 40% के बीच रह सकता है।


तिमाही-दर-तिमाही सुधार और 'प्रोजेक्ट लक्ष्य' का प्रभाव

भले ही सालाना आधार पर नतीजे कमजोर रहे हों, लेकिन तिमाही-दर-तिमाही ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के प्रदर्शन में सुधार दिखा है। कंपनी को मार्च तिमाही में ₹870 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ था, जो अब जून तिमाही में घटकर ₹428 करोड़ पर आ गया। कंपनी के रेवेन्यू में भी तिमाही आधार पर बढ़ोतरी देखी गई है।


सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कंपनी का ऑटो बिजनेस जून तिमाही के दौरान EBITDA (एबिटडा) के स्तर पर मुनाफे में आ गया है। कंपनी ने 14 जुलाई को एक बयान में कहा, "कंपनी के ऑटो बिजनेस ने जून में EBITDA को पॉजिटिव बना दिया, जो कंपनी की वर्टिकल इंटीग्रेशन स्ट्रैटजी के कारण मजबूत ग्रॉस मार्जिन के कारण संभव हुआ।"


कंपनी ने बताया कि उसकी लागत घटाने की पहल 'प्रोजेक्ट लक्ष्य' के चलते ऑटो बिजनेस में एफिशिएंसी बढ़ी है। इसके ऑटो सेगमेंट का मासिक ऑपरेटिंग खर्च ₹178 करोड़ से घटकर ₹105 करोड़ हो गया है। फिलहाल कंसोलिडेटेड ऑपरेटिंग खर्च ₹150 करोड़ पर है, जिसे FY26 तक और घटाकर ₹130 करोड़ करने का लक्ष्य है।


कंपनी के मुताबिक, Q1 में ऑटो व्यवसाय का ऑपरेटिंग कैश फ्लो लगभग न्यूट्रल रहा, जबकि फ्री कैश फ्लो ₹455 करोड़ से बढ़कर ₹107 करोड़ हो गया। यह वित्तीय अनुशासन और लागत नियंत्रण के प्रयासों को दर्शाता है, जिसने निवेशकों को भविष्य के लिए आशावादी बनाया है।

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