NSE का शेयर इंडिया सिक्योरिटीज पर ₹1.18 लाख का जुर्माना: जानें क्या है मामला?

NSE का शेयर इंडिया सिक्योरिटीज पर ₹1.18 लाख का जुर्माना: जानें क्या है मामला?



नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) ने शेयर इंडिया सिक्योरिटीज लिमिटेड पर ₹1,18,000 (₹18,000 के IGST सहित) का मौद्रिक जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना 24 जुलाई, 2025 को 'IEX' सिक्योरिटी पर प्रतिबंध अवधि के दौरान अनजाने में ओपन पोजीशन में वृद्धि से संबंधित है, जो NSE के सर्कुलर नंबर NSCC/F&O/C&S/365 दिनांक 26 अगस्त, 2004 का उल्लंघन है।


जुर्माने का पूरा विवरण

विवरण जानकारी

प्राधिकरण नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड (NSE)

कार्रवाई का प्रकार मौद्रिक जुर्माना

जुर्माने की राशि ₹1,18,000 (₹18,000 के IGST सहित)

इनवॉइस की तारीख 24 जुलाई, 2025

उल्लंघन का विवरण प्रतिबंध अवधि के दौरान 'IEX' सिक्योरिटी में अनजाने में ओपन पोजीशन में वृद्धि

वित्तीय, संचालन या अन्य गतिविधियों पर प्रभाव कोई खास प्रभाव नहीं


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यह जुर्माना 24 जुलाई, 2025 की एक विशेष घटना से संबंधित है। उस दिन, Share India Securities ने अनजाने में 'IEX' सिक्योरिटी में अपनी ओपन पोजीशन बढ़ा दी, जबकि उस सिक्योरिटी में ट्रेडिंग प्रतिबंधित थी। NSE ने बाजार की अखंडता बनाए रखने और प्रतिबंध अवधि के दौरान अनुचित अटकलों को रोकने के लिए ऐसे दिशानिर्देश स्थापित किए हैं, जिनका उल्लंघन हुआ है।


कंपनी का बयान और अनुपालन पर प्रतिबद्धता

शेयर इंडिया सिक्योरिटीज लिमिटेड ने इस मामले पर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है कि वह उच्चतम अनुपालन मानकों को बनाए रखेगी और इस मुद्दे को हल करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह जुर्माना स्टॉक ब्रोकिंग के सामान्य कारोबार के दौरान लगाया गया था और इससे उसके वित्तीय, संचालन या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों पर कोई खास प्रभाव पड़ने की उम्मीद नहीं है।


Company ने नियामक आवश्यकताओं का पालन करने और यह सुनिश्चित करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई कि उसके सभी संचालन निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुरूप हैं। इसमें भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आंतरिक नियंत्रणों और प्रक्रियाओं की समीक्षा भी शामिल है।


चूंकि कंपनी का मानना है कि इस जुर्माने का उसके वित्तीय या परिचालन पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा, इसलिए बाजार में किसी महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं है। यह घटना सभी ब्रोकरेज फर्मों के लिए एक रिमाइंडर है कि उन्हें नियामक दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करना चाहिए।

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