स्नैपडील के मालिक ऐसवेक्टर ने कॉन्फिडेंशियल रूट से दाखिल किया IPO ड्राफ्ट: ₹500 करोड़ जुटाने का लक्ष्य!

स्नैपडील के मालिक ऐसवेक्टर ने कॉन्फिडेंशियल रूट से दाखिल किया IPO ड्राफ्ट: ₹500 करोड़ जुटाने का लक्ष्य!


ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस स्नैपडील (Snapdeal) की पेरेंट कंपनी, ऐसवेक्टर (Acevector), ने अपने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के लिए कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI के पास ड्राफ्ट जमा कर दिया है। खास बात यह है कि यह ड्राफ्ट कॉन्फिडेंशियल रूट से फाइल किया गया है। शनिवार को एक सार्वजनिक घोषणा में, ऐसवेक्टर ने बताया कि उसने SEBI और स्टॉक एक्सचेंजों के पास अपने IPO के लिए प्री-फाइल्ड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) जमा कर दिया है। अनुमान है कि स्नैपडील इस पब्लिक इश्यू से ₹500 करोड़ तक जुटा सकती है।

ऐसवेक्टर की स्थापना कुणाल बहल (Kunal Bahl) और रोहित बंसल (Rohit Bansal) ने की थी। यह सिर्फ स्नैपडील ही नहीं, बल्कि सॉफ्टवेयर-एज-ए-सर्विस (SaaS) प्लेटफॉर्म यूनिकॉमर्स (Unicommerce) और कंज्यूमर ब्रांड बिल्डिंग फर्म स्टेलर ब्रांड्स (Stellar Brands) को भी ऑपरेट करती है। यूनिकॉमर्स ने हाल ही में अगस्त 2024 में शेयर बाजार में लिस्टिंग की थी, जहाँ उसके ₹276.57 करोड़ के IPO को 168.35 गुना जबरदस्त सब्सक्रिप्शन मिला था।

क्या है 'कॉन्फिडेंशियल रूट'?

कॉन्फिडेंशियल रूट, कंपनियों को IPO लॉन्च पर अंतिम फैसला लेने तक अपनी व्यावसायिक जानकारी गोपनीय रखने की सुविधा देता है। यह कंपनियों को लचीलापन प्रदान करता है कि वे बाजार की बदलती परिस्थितियों के आधार पर, बिना संवेदनशील जानकारी का खुलासा किए, बाद में अपने ड्राफ्ट को वापस भी ले सकें।

एक स्टैंडर्ड DRHP फाइलिंग के बाद एक सार्वजनिक दस्तावेज बन जाता है, जबकि कॉन्फिडेंशियल प्री-फाइलिंग कंपनियों को संवेदनशील व्यापारिक विवरण, वित्तीय मेट्रिक्स और जोखिमों को गोपनीय रखने की अनुमति देती है, खासकर प्रतिस्पर्धियों से। यह रणनीति उन कंपनियों के लिए फायदेमंद होती है जो प्रतिस्पर्धी बाजारों में काम कर रही हैं और अपनी रणनीतिक जानकारी को सार्वजनिक होने से बचाना चाहती हैं।


किन कंपनियों ने भी चुना यह रूट?

हाल के महीनों में कई प्रमुख कंपनियों ने कॉन्फिडेंशियल रूट से IPO ड्राफ्ट जमा किए हैं। इनमें शामिल हैं:


आईनॉक्स क्लीन एनर्जी (Inox Green Energy)

लॉजिस्टिक्स कंपनी शैडोफैक्स टेक्नोलोजिज (Shadowfax Technologies)

स्टॉक ब्रोकिंग फर्म ग्रो (Groww)

गाजा अल्टरनेटिव एसेट मैनेजमेंट (Gaja Alternative Asset Management)

कॉमर्स इनेबलमेंट प्लेटफॉर्म शिपरॉकेट (Shiprocket)

टाटा कैपिटल (Tata Capital)

एडटेक यूनिकॉर्न फिजिक्सवाला (Physicswallah)


वियरेबल्स ब्रांड बोट (boAt) की पेरेंट कंपनी इमेजिन मार्केटिंग (Imagine Marketing)

इसके अलावा, 2024 में फूड डिलीवरी कंपनी स्विगी (Swiggy) और रिटेल चेन विशाल मेगा मार्ट (Vishal Mega Mart) ने भी इसी तरह की फाइलिंग के बाद अपने आईपीओ जारी किए थे। यह दर्शाता है कि भारतीय बाजार में कॉन्फिडेंशियल फाइलिंग का चलन बढ़ रहा है।

स्नैपडील का यह कदम, भारत के ई-कॉमर्स बाजार में उसकी स्थिति को मजबूत करने और भविष्य की विकास योजनाओं को गति देने में सहायक हो सकता है। क्या स्नैपडील अपनी खोई हुई चमक वापस ला पाएगी? यह तो IPO के बाद ही पता चलेगा।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

IPO से पहले Lenskart को 'सुपर-विजन': फिडेलिटी ने $6.1 अरब पर आंका वैल्यूएशन, क्या है खास?

जयप्रकाश एसोसिएट्स के लिए वेदांता की ₹17,000 करोड़ की बोली, Adani Group को पछाड़कर मारी बाजी

साइबर हमले ने Jaguar Land Rover का पूरा मुनाफा किया खत्म, Tata Motors के शेयर 3% से ज्यादा लुढ़के