Zepto का IPO टला: जोमैटो और स्विगी को मिली 'खुली पिच', शेयर बाजार में दौड़ी खुशी की लहर!

Zepto का IPO टला: जोमैटो और स्विगी को मिली 'खुली पिच', शेयर बाजार में दौड़ी खुशी की लहर!


भारतीय शेयर बाजार में आज, 4 जून, 2025 को फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स के प्रमुख खिलाड़ियों जोमैटो (Eternal) और स्विगी (Swiggy) के शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली। जहां जोमैटो का शेयर 3.08% बढ़कर ₹245 के आसपास कारोबार कर रहा है, वहीं स्विगी 8.63% की जबरदस्त बढ़त के साथ ₹362 के आसपास पहुंच गया। इस 'बहार' के पीछे एक बड़ी खबर है: प्रतिद्वंद्वी क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म Zepto ने अपना बहुप्रतीक्षित आईपीओ अगले साल 2026 तक के लिए टाल दिया है।

Zepto के इस फैसले ने बाजार में मौजूदा खिलाड़ियों के लिए राहत की सांस ली है। यह देरी सिर्फ एक रणनीतिक निर्णय नहीं, बल्कि कई आंतरिक और बाहरी चुनौतियों का परिणाम है, जो Zepto के लिए एक कठिन दौर का संकेत देती है।

क्यों टला Zepto का IPO? चुनौतियों का अंबार

Zepto, जिसे इसी साल अपना आईपीओ लाना था, ने अब इसे 2026 तक के लिए स्थगित कर दिया है। इस देरी के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं:

नियामकीय अड़चनें: मुंबई के धारावी स्टोर पर एक हालिया छापे के बाद स्टोर का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। कंपनी पर खाद्य सुरक्षा मानकों (Food Safety Standards) का उल्लंघन करने और कई अन्य खामियां मिलने का आरोप है। ऐसे में नियामकीय जांच और अनुपालन कंपनी के आईपीओ योजनाओं में बड़ी बाधा बन गए हैं।

वित्तीय सेहत कमजोर: Zepto ने स्वीकार किया है कि आईपीओ लाने के लिए उसकी वित्तीय सेहत अभी उतनी मजबूत नहीं है। कंपनी का 'कैश बर्न' (Cash Burn) अभी भी काफी ज्यादा है, जिसमें हर महीने लगभग $60-70 मिलियन (लगभग ₹500-₹580 करोड़) खर्च हो रहे हैं।

राजस्व और लाभ में कमी: पिछली चौथी तिमाही में कंपनी का आय और मुनाफा दोनों ही लक्ष्य से कम रहे हैं, जो निवेशकों के विश्वास को प्रभावित कर सकता था।

उच्च परिचालन लागत: कंपनी के लिए हर महीने ₹100 करोड़ का सैलरी बिल (डिलीवरी पार्टनर्स सहित) देना मुश्किल हो रहा है, जो इसकी लाभप्रदता पर सीधा असर डाल रहा है।

डिलीवरी पार्टनर्स से विवाद: डिलीवरी पार्टनर्स के साथ विवाद और दिल्ली-NCR में कई स्टोर बंद होने की खबरें भी कंपनी के परिचालन स्थिरता पर सवाल खड़े करती हैं।

बाजार का माहौल: स्विगी जैसे अन्य क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के वैल्युएशन में हालिया गिरावट ने भी Zepto को अपने आईपीओ के लिए सही समय का इंतजार करने पर मजबूर किया हो सकता है।

जोमैटो और स्विगी के लिए 'फायदे का सौदा':

Zepto के आईपीओ का टलना जोमैटो और स्विगी, दोनों के लिए एक सकारात्मक खबर है। क्विक कॉमर्स सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा अत्यधिक है, और एक प्रमुख खिलाड़ी का बाजार में आने में देरी करना मौजूदा दिग्गजों को अपनी स्थिति और मजबूत करने का अवसर देगा:

कम प्रतिस्पर्धा: Zepto के लिस्टिंग न होने से बाजार में एक नए बड़े फंडेड प्लेयर का दबाव कम होगा, जिससे जोमैटो के ब्लिंकिट और स्विगी के इंस्टामार्ट जैसे सेगमेंट को अपनी बाजार हिस्सेदारी मजबूत करने का मौका मिलेगा।

निवेशकों का बढ़ता विश्वास: Zepto की चुनौतियों ने निवेशकों का ध्यान जोमैटो और स्विगी के तुलनात्मक रूप से बेहतर वित्तीय स्वास्थ्य और मजबूत बाजार स्थिति पर केंद्रित किया है।

वैल्यूएशन को सहारा: एक प्रतिस्पर्धी के आईपीओ से जुड़ी अनिश्चितता दूर होने से बाजार में मौजूदा खिलाड़ियों के मूल्यांकन को सहारा मिलेगा।

यह घटनाक्रम भारतीय क्विक कॉमर्स और फूड डिलीवरी बाजार की अस्थिरता और चुनौतियों को दर्शाता है। जबकि Zepto अपने आंतरिक मुद्दों को सुलझाने की कोशिश कर रहा है, जोमैटो और स्विगी के लिए यह अपने वर्चस्व को और बढ़ाने का सुनहरा अवसर है।

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