SEBI का अहम फैसला: करेंसी से इक्विटी डेरिवेटिव में SGF ट्रांसफर को मिली मंज़ूरी, बाज़ार के लिए क्या हैं मायने?

SEBI का अहम फैसला: करेंसी से इक्विटी डेरिवेटिव में SGF ट्रांसफर को मिली मंज़ूरी, बाज़ार के लिए क्या हैं मायने?


भारतीय पूंजी बाज़ार नियामक SEBI (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) ने क्लियरिंग कॉर्पोरेशंस को एक महत्वपूर्ण राहत दी है। अब वे अपने कोर सेटलमेंट गारंटी फंड (SGF) को करेंसी डेरिवेटिव सेगमेंट से इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट में ट्रांसफर कर सकेंगे। यह कदम बाज़ार के लिए एक 'सेफ्टी नेट' की तरह काम करेगा, खासकर ऐसे समय में जब एक्सचेंज-ट्रेडेड करेंसी ट्रेडिंग वॉल्यूम में भारी गिरावट आई है।

कोर SGF एक सुरक्षा कवच होता है, जो तब सक्रिय होता है जब क्लियरिंग ब्रोकर्स किसी अप्रत्याशित परिस्थिति या डिफ़ॉल्ट के कारण अपनी देनदारियों को पूरा करने में असमर्थ हो जाते हैं। यह फंड सुनिश्चित करता है कि बाज़ार में सेटलमेंट की प्रक्रिया बिना किसी बाधा के जारी रहे, जिससे निवेशकों का विश्वास बना रहता है।

क्यों पड़ी इस ट्रांसफर की ज़रूरत?

क्लियरिंग कॉर्पोरेशंस ने SEBI से यह 'वन-टाइम' ट्रांसफर की इजाज़त मांगी थी। दरअसल, पिछले साल मई में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) का एक सर्कुलर लागू होने के बाद से करेंसी डेरिवेटिव सेगमेंट में ट्रेडिंग वॉल्यूम में उल्लेखनीय कमी आई है। इस गिरावट के कारण, करेंसी सेगमेंट में बनाए गए कोर SGF का एक बड़ा हिस्सा अप्रयुक्त पड़ा था, जबकि इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट में पूंजी की आवश्यकता बनी हुई थी।

SEBI की इस मंज़ूरी के बाद, क्लियरिंग कॉर्पोरेशंस अब इक्विटी डेरिवेटिव (F&O) सेगमेंट में किसी भी संभावित शॉर्टफॉल को पूरा करने के लिए करेंसी सेगमेंट के कोर SGF का उपयोग कर पाएंगी। क्लियरिंग कॉर्पोरेशंस आमतौर पर सबसे ज़्यादा मासिक टेस्ट नंबर के आधार पर करेंसी कोर SGF मेंटेन करती हैं।

BSE और NSE ने उठाया फ़ायदा

इस मंज़ूरी का फ़ायदा उठाने वाली कंपनियों में BSE की क्लियरिंग इकाई ICCL (इंडियन क्लियरिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड) प्रमुख रही। ICCL ने SEBI से मंज़ूरी मिलने के बाद करेंसी डेरिवेटिव के कोर SGF से इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट में ₹444 करोड़ का ट्रांसफर किया। मई में, BSE के डेटा के अनुसार, इक्विटी डेरिवेटिव में कोर SGF का मौजूदा बैलेंस ₹883.22 करोड़ था, जबकि करेंसी डेरिवेटिव सेगमेंट में यह ₹13.89 करोड़ था। ICCL ने दिसंबर 2024 में कोर SGF में ₹147 करोड़ का अतिरिक्त योगदान किया था, जिसे इस साल मार्च तिमाही में रिवर्स कर दिया गया।

इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने भी SEBI की इजाज़त का लाभ उठाया है। इंडस्ट्री सूत्रों के अनुसार, NSE क्लियरिंग ने करेंसी डेरिवेटिव के कोर SGF से ₹209 करोड़ का ट्रांसफर इक्विटी डेरिवेटिव के कोर SGF में किया है। वर्तमान में, NSE के करेंसी सेगमेंट कोर SGF में लगभग ₹166 करोड़ और इक्विटी डेरिवेटिव कोर SGF में लगभग ₹11,400 करोड़ हैं।

SEBI का यह लचीलापन बाज़ार की बदलती ज़रूरतों के प्रति उसकी प्रतिक्रियाशीलता को दर्शाता है। यह कदम पूंजी के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करेगा और वित्तीय बाज़ार में स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने में मदद करेगा।

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