L&T का 'ग्रीन' फंड जुटाने का नया अध्याय: ₹500 करोड़ के ESG बॉन्ड से पर्यावरण बचाएगी कंपनी, SEBI के नए फ्रेमवर्क का मिला साथ!

L&T का 'ग्रीन' फंड जुटाने का नया अध्याय: ₹500 करोड़ के ESG बॉन्ड से पर्यावरण बचाएगी कंपनी, SEBI के नए फ्रेमवर्क का मिला साथ!

भारत की Engineering और construction दिग्गज लार्सन एंड टुब्रो (L&T) अब सतत विकास (Sustainability) की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रही है। कंपनी ने घोषणा की है कि वह ESG (पर्यावरण, सामाजिक और गवर्नेंस) बॉन्ड के जरिए ₹500 करोड़ जुटाएगी। इस लेनदेन में HSBC एकमात्र लीड मैनेजर के रूप में कार्य कर रहा है। खास बात यह है कि L&T, सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) द्वारा हाल ही में जारी किए गए 'ESG और सस्टेनेबिलिटी से जुड़े बॉन्ड फ्रेमवर्क' के तहत यह विकल्प चुनने वाली पहली भारतीय कंपनी बन गई है।

यह कदम ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर निवेशक पर्यावरणीय और सामाजिक रूप से जिम्मेदार कंपनियों में निवेश करने को प्राथमिकता दे रहे हैं।

SEBI का नया फ्रेमवर्क: पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर

SEBI ने 5 जून, 2025 को यह नया Regulatory Framework जारी किया था। इसका मुख्य मकसद पर्यावरणीय, सामाजिक और गवर्नेंस (ESG) मानकों के अनुरूप वित्तीय उत्पादों में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देना है। इस फ्रेमवर्क के तहत, बॉन्ड जारी करने वाली कंपनियों को कई अनिवार्यताओं का पालन करना होगा:

sustainability उद्देश्यों का खुलासा: कंपनियों को स्पष्ट रूप से बताना होगा कि वे किस sustainability उद्देश्य के लिए फंड जुटा रही हैं।

थर्ड-पार्टी असेसमेंट: एक्सटर्नल असेसमेंट या थर्ड-पार्टी ओपिनियन अनिवार्य होगा, जिससे बॉन्ड के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव की विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सके।

प्रभाव रिपोर्टिंग: बॉन्ड जारी करने के बाद, कंपनियों को नियमित रूप से यह रिपोर्ट करना होगा कि जुटाए गए फंड का उपयोग कैसे किया जा रहा है और उनका वास्तविक पर्यावरणीय या सामाजिक प्रभाव क्या रहा है।

यह फ्रेमवर्क भारतीय बाजार में 'ग्रीन' फाइनेंसिंग के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगा और निवेशकों को अधिक विश्वसनीय ESG निवेश विकल्प प्रदान करेगा।

L&T के महत्वाकांक्षी पर्यावरणीय लक्ष्य

L&T ने बताया है कि ESG बॉन्ड्स के तहत जुटाए गए फंड का उपयोग उसके उन पर्यावरणीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए किया जाएगा, जिनमें वह प्रतिबद्ध है। इन लक्ष्यों में मुख्य रूप से शामिल हैं:

ताजे जल की खपत कम करना: कंपनी अपने परिचालन में जल के उपयोग को दक्षता से प्रबंधित करने पर ध्यान केंद्रित करेगी।

ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाना: L&T अपने कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए विभिन्न उपायों को लागू करेगी।

ये पहलें L&T के दीर्घकालिक स्थिरता लक्ष्यों के अनुरूप हैं, जो काफी महत्वाकांक्षी हैं:

2035 तक Water Neutrality: इसका मतलब है कि L&T जितना ताजा पानी इस्तेमाल करेगी, उतना ही रीसाइक्लिंग या अन्य तरीकों से बचाकर पर्यावरण के जलस्रोत को रिचार्ज भी करेगी।

2040 तक Carbon Neutrality: कंपनी का लक्ष्य है कि जितना कार्बन उत्सर्जन वह करेगी, उतनी ही मात्रा में हानिकारक गैसों को पर्यावरण से दूर करने या अवशोषित करने के उपाय भी करेगी।

L&T का यह कदम न केवल पर्यावरण संरक्षण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि यह भारतीय कॉरपोरेट सेक्टर के लिए भी एक मिसाल पेश करता है कि कैसे कंपनियां वित्तीय साधनों का उपयोग करते हुए पर्यावरणीय और सामाजिक जिम्मेदारियों को निभा सकती हैं। SEBI के नए फ्रेमवर्क के साथ, भारत में ESG फाइनेंसिंग का भविष्य उज्ज्वल दिख रहा है।

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