HDFC बैंक ने लीलावती ट्रस्ट के आरोपों को बताया 'फर्जी' और 'द्वेषपूर्ण', CEO पर लगे आरोपों का किया खंडन
HDFC बैंक ने लीलावती ट्रस्ट के आरोपों को बताया 'फर्जी' और 'द्वेषपूर्ण', CEO पर लगे आरोपों का किया खंडन
मुंबई, भारत – निजी क्षेत्र के सबसे बड़े BANK, HDFC Bank ने मुंबई के लीलावती कीर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट द्वारा लगाए गए वित्तीय धोखाधड़ी और हेरफेर के आरोपों को एक बार फिर सिरे से खारिज कर दिया है। बैंक के प्रवक्ता ने इन आरोपों को "झूठा, द्वेषपूर्ण और बैंक की छवि खराब करने वाला" बताया है।
BANK की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में स्पष्ट रूप से कहा गया है: "न तो HDFC Bank और न ही इसके मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ किसी भी तरह की अनैतिक और अवैध गतिविधियों में शामिल हैं। बैंक और उसके एमडी-सीईओ सभी नियामक नियमों और सरकारी मानकों का पूरी तरह से पालन करते हैं।"
बैंक की प्रतिष्ठा बचाने के लिए कानूनी कार्रवाई की तैयारी
एचडीएफसी बैंक ने आगे कहा कि उसने अपने हितों और प्रतिष्ठित छवि को किसी भी नुकसान से बचाने के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। बैंक ने स्पष्ट किया कि उसके पास रिकवरी, प्रवर्तन और मानहानि से जुड़े कदम उठाने का पूरा अधिकार है।
प्रवक्ता ने जोर देकर कहा, "हम अपने सभी स्टेकहोल्डर्स के लिए चिंतित हैं। हम विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर उन लोगों के खिलाफ कानूनी कदम उठाने जा रहे हैं, जिन्होंने अपने स्वार्थ से प्रेरित होकर हम पर अनर्गल और बेबुनियाद आरोप लगाए हैं।"
आरोपों के पीछे 'लोन रिकवरी' में बाधा डालने का मकसद?
एचडीएफसी बैंक का मानना है कि इन आरोपों के पीछे का असली मकसद बैंक की लोन रिकवरी प्रक्रिया में बाधा डालना है। बैंक ने मीडिया और आम जनता से ऐसे आरोपों के बारे में बात करने में सावधानी बरतने का आग्रह किया है, जो आधारहीन और बेतुके हैं, और जिनका एकमात्र उद्देश्य बैंक और इसकी लीडरशिप को नुकसान पहुंचाना है।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब लीलावती कीर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट ने बैंक के सीईओ और एमडी शशिधर जगदीशन (Shashidhar Jagdishan) सहित अन्य पर ₹25 करोड़ के संदिग्ध संपत्ति लेनदेन में हेरफेर का आरोप लगाया था। ट्रस्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जगदीशन को निलंबित करने और उन पर मुकदमा चलाने की भी अपील की थी। बैंक ने पहले भी इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि ट्रस्टी प्रशांत मेहता और उनके परिवार पर बैंक का भारी बकाया है, जिसे उन्होंने कभी चुकाया नहीं है।
यह मामला अब कानूनी और नियामक जांच के दायरे में है, और बैंक का यह ताजा बयान अपनी स्थिति को और मजबूती से प्रस्तुत करने का एक प्रयास है।

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