EV इंडस्ट्री पर मंडरा रहा खतरा: चीन ने 'रेयर अर्थ मैग्नेट्स' की सप्लाई रोकी तो रुक सकता है इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का उत्पादन!

EV इंडस्ट्री पर मंडरा रहा खतरा: चीन ने 'रेयर अर्थ मैग्नेट्स' की सप्लाई रोकी तो रुक सकता है इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का उत्पादन!


भारत की तेजी से बढ़ रही इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इंडस्ट्री को अचानक एक बड़ा झटका लग सकता है। इसकी वजह है 'रेयर अर्थ मैग्नेट्स' की कमी, जो इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के साथ-साथ स्मार्टफोन जैसे कई हाई-टेक प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल होते हैं। इन एलिमेंट्स का उत्पादन बेहद जटिल और महंगा है, और दुर्भाग्य से, इनकी वैश्विक सप्लाई का 90% हिस्सा चीन से आता है। अब चीन ने टैरिफ वॉर में अमेरिका पर दबाव बनाने के लिए इसकी सप्लाई घटा दी है, जिसका असर भारत सहित दुनिया के कई देशों पर पड़ रहा है।

बजाज ऑटो के बाद TVS मोटर ने भी जताई चिंता

सबसे पहले, बजाज ऑटो ने रेयर अर्थ मैग्नेट्स की सप्लाई को लेकर अपनी चिंता जताई थी। उसने चेतावनी दी थी कि अगर सप्लाई नहीं बढ़ी तो इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के उत्पादन को भारी नुकसान हो सकता है। अब, TVS मोटर ने भी इस खतरे को उजागर किया है। TVS मोटर ने कहा है कि अगर सप्लाई की स्थिति नहीं सुधरती है, तो अगले महीने तक इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का उत्पादन पूरी तरह से ठप पड़ सकता है। इलेक्ट्रिक मोटर के सुचारू रूप से काम करने के लिए ये मैग्नेट्स बेहद जरूरी हैं।


चीन के बंदरगाहों पर अटके शिपमेंट्स:

चौंकाने वाली बात यह है कि रेयर अर्थ मैग्नेट्स के शिपमेंट्स 4 अप्रैल से ही चीन के बंदरगाहों पर अटके पड़े हैं। ये शिपमेंट्स तभी भारत पहुंचेंगे जब भारतीय EV कंपनियां रेयर अर्थ मैग्नेट्स के उपयोग के बारे में एक विस्तृत 'डेक्लरेशन' (घोषणा) देंगी। यह सर्टिफिकेशन प्रक्रिया भारतीय अथॉरिटीज के माध्यम से पूरी होगी, जिसके बाद चीन के दूतावास की अंतिम मंजूरी आवश्यक होगी। बताया जा रहा है कि अब तक भारतीय मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों ने 30 से अधिक आवेदन दिए हैं, लेकिन उनमें से किसी को भी अभी तक मंजूरी नहीं मिली है। यह स्थिति भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, खासकर इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स बनाने वाली कंपनियों के लिए खतरे की घंटी है।


EV इंडस्ट्री की रफ्तार पर ब्रेक?

एक्सिस सिक्योरिटीज के ऑटो एनालिस्ट श्रीधर कलानी ने कहा, "भारतीय ईवी OEM (ऑरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर) के लिए एक बड़ा जोखिम पैदा हो गया है।" उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025 में भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की बिक्री 11 लाख यूनिट्स से अधिक रही है। भारत में रेयर अर्थ मैग्नेट्स का उत्पादन न के बराबर होता है, जिससे इसकी सप्लाई से जुड़ी दिक्कतें एक बड़ी मुश्किल पैदा कर सकती हैं।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रेयर अर्थ मैग्नेट्स के कुल वैश्विक उत्पादन में चीन की हिस्सेदारी लगभग 90% है। मलेशिया, वियतनाम और ऑस्ट्रेलिया में भी इसका उत्पादन होता है, लेकिन वह वैश्विक जरूरत के मुकाबले काफी कम है। दूसरा, इन देशों से इनका आयात करना भारतीय कंपनियों के लिए काफी महंगा पड़ेगा, जिससे इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की लागत बढ़ सकती है।

यदि चीन द्वारा यह गतिरोध जल्द दूर नहीं होता है, तो भारत की महत्वाकांक्षी इलेक्ट्रिक व्हीकल अपनाने की योजना को एक बड़ा झटका लग सकता है, और स्थानीय उत्पादन इकाइयां गंभीर संकट में आ सकती हैं।

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