इंफोसिस की '₹700 की नई चाल': कर्मचारियों को इंटरव्यू लेने पर मिलेगा कैश रिवॉर्ड, क्या यह असंतोष दूर करेगा?
इंफोसिस की '₹700 की नई चाल': कर्मचारियों को इंटरव्यू लेने पर मिलेगा कैश रिवॉर्ड, क्या यह असंतोष दूर करेगा?
भारत की अग्रणी आईटी कंपनियों में से एक, इंफोसिस ने एक अनोखी रिक्रूटमेंट रिवॉर्ड स्कीम शुरू की है, जिसने कर्मचारियों के बीच हलचल मचा दी है। इस नई नीति के तहत, जो कर्मचारी नई भर्तियों के लिए इंटरव्यू लेंगे, उन्हें प्रति इंटरव्यू ₹700 का कैश रिवॉर्ड दिया जाएगा। यह इंफोसिस में अपनी तरह का पहला कदम है, जिसका सीधा मकसद कर्मचारियों को कंपनी की हायरिंग प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करना है।
यह कार्यक्रम 1 जनवरी, 2025 से लागू माना जाएगा, जिसका मतलब है कि कर्मचारी पिछले पांच महीनों में लिए गए इंटरव्यू के लिए भी इस रिवॉर्ड का दावा कर सकते हैं। यह नई कैश इंसेंटिव पॉलिसी विशेष रूप से उन वरिष्ठ कर्मचारियों के लिए लाई गई है जो लेटरल हायरिंग (अनुभवी पेशेवरों की भर्ती) के लिए इंटरव्यू लेते हैं। कंपनी का लक्ष्य इसके माध्यम से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाना और इंटरव्यू प्रक्रिया में उनकी भागीदारी को महत्व देते हुए उन्हें पुरस्कृत करना है।
क्या है नई पॉलिसी की बारीकियां?
₹700 प्रति इंटरव्यू: कर्मचारी हर इंटरव्यू के लिए 700 पॉइंट्स अर्जित करेंगे, जो सीधे ₹700 नकद के बराबर हैं।
HR को छूट: HR और टैलेंट एक्विजिशन टीमों के कर्मचारी इस रिवॉर्ड प्रोग्राम का हिस्सा नहीं होंगे, क्योंकि यह उनके मूल कार्य का हिस्सा है।
शर्तें लागू: यदि कोई इंटरव्यू रद्द हो जाता है या उम्मीदवार नहीं आता है, तो कर्मचारी रिवॉर्ड का दावा नहीं कर पाएंगे।
पहले, इंटरव्यू लेने के लिए कोई नकद प्रोत्साहन नहीं मिलता था। कंपनी केवल वीकेंड में कैंपस में लिए गए इंटरव्यू के लिए कंपनसेटरी लीव (छुट्टी) देती थी। एक कर्मचारी के अनुसार, यह नई योजना टीम मैनेजर्स और मिड-लेवल लीडर्स को कंपनी में उच्च गुणवत्ता वाले टैलेंट को लाने के लिए एक मजबूत प्रोत्साहन देगी।
असंतोष के बीच 'इनाम' की कवायद?
यह नई रिवॉर्ड पॉलिसी एक ऐसे समय में आई है जब इंफोसिस के कर्मचारियों के एक बड़े वर्ग में वेतन वृद्धि और प्रदर्शन बोनस को लेकर असंतोष देखा जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2024 के लिए कर्मचारियों को 5-8% का मामूली वेतन वृद्धि मिली थी, और मार्च 2025 तिमाही के लिए परफॉर्मेंस बोनस भी कम था, जिससे कर्मचारियों में निराशा थी।
इसी पृष्ठभूमि में, इंफोसिस के सीईओ सलिल पारेख की सैलरी में वित्तीय वर्ष 2026 के लिए 22% की बंपर वृद्धि हुई है, जिससे उनका वार्षिक भुगतान ₹80.62 करोड़ हो गया है। पारेख को उनकी मौद्रिक क्षतिपूर्ति के साथ 3,82,071 प्रतिबंधित स्टॉक यूनिट (RSUs) भी प्रदान की गईं। एक तरफ जहां हजारों कर्मचारियों को मामूली वृद्धि मिली, वहीं दूसरी तरफ सीईओ की सैलरी में इतनी बढ़ोतरी होना कर्मचारियों के लिए थोड़ा हताश करने वाला रहा है।
ऐसे में, यह नई कैश इंसेंटिव पॉलिसी कंपनी के भीतर के असंतोष को शांत करने और कर्मचारियों को रिक्रूटमेंट प्रक्रिया में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करने का एक प्रयास हो सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह '₹700 प्रति इंटरव्यू' की रणनीति कंपनी के टैलेंट एक्विजिशन लक्ष्यों को कितना पूरा कर पाती है और कर्मचारियों के मनोबल पर इसका क्या दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है।

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