महाराष्ट्र में शराब हुई 40% तक महंगी: यूनाइटेड स्पिरिट्स को लगा 'झटका', GM ब्रुअरीज के 'पंख'!

महाराष्ट्र में शराब हुई 40% तक महंगी: यूनाइटेड स्पिरिट्स को लगा 'झटका', GM ब्रुअरीज के 'पंख'!


महाराष्ट्र में शराब प्रेमियों को अब अपनी पसंदीदा ड्रिंक्स के लिए ज़्यादा पैसे चुकाने होंगे। राज्य सरकार ने शराब पर एक्साइज ड्यूटी (आबकारी शुल्क) में बढ़ोतरी का फैसला किया है, जिससे कीमतें 40 फीसदी तक बढ़ने की उम्मीद है। इस फैसले का शेयर बाजार पर तुरंत और विरोधाभासी असर देखने को मिला: जहां दिग्गज शराब कंपनी यूनाइटेड स्पिरिट्स (USL) के शेयर 6% तक टूटकर आज वायदा बाजार के टॉप लूजर बन गए, वहीं महाराष्ट्र में बनी शराब पर ड्यूटी में छूट के चलते GM BREWERIES के शेयरों में करीब 14% की जोरदार तेजी आई।

राज्य सरकार को इस कदम से ₹14,000 करोड़ का अतिरिक्त रेवेन्यू मिलने की उम्मीद है, जिससे सरकारी खजाने में एक बड़ी रकम आएगी।


महंगी हुई 'बोतल': क्या है असर?

महाराष्ट्र सरकार ने देशी और विदेशी दोनों तरह की शराब पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई है। IMFL (भारत में बनी विदेशी शराब) पर एक्साइज ड्यूटी में 50-60 फीसदी की बड़ी बढ़ोतरी की गई है। यह 2011 के बाद से एक्साइज में सबसे बड़ी वृद्धि है। ड्यूटी बढ़ने से खुदरा शराब की कीमतों में 30-50 फीसदी का इजाफा संभव है, जिससे ग्राहकों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।

यूनाइटेड स्पिरिट्स (USL) पर दबाव: इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL) उद्योग में महाराष्ट्र का 10-12% योगदान है, और USL की कुल बिक्री में महाराष्ट्र का 20-22% हिस्सा है। बाजार जानकारों का अनुमान है कि इस ड्यूटी वृद्धि से USL के अर्निंग्स पर शेयर (EPS) पर 6-8% का दबाव पड़ सकता है।

Radico Khaitan भी प्रभावित: रैडिको खेतान की कुल बिक्री में भी महाराष्ट्र का 7-8% योगदान है, और इसके EPS पर 2-3% असर पड़ने की संभावना है।

GM ब्रुअरीज की 'बल्ले-बल्ले':

हालांकि, यह पूरी खबर सिर्फ महंगी शराब और नुकसान के बारे में नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, महाराष्ट्र में बनी शराब पर ड्यूटी में छूट दी गई है। इसी के चलते GM BREWERIES, जो मुख्य रूप से महाराष्ट्र में बनी शराब का उत्पादन करती है, के शेयरों में आज करीब 14% की जोरदार तेजी दर्ज की गई। यह दिखाता है कि नीतिगत बदलावों का असर कंपनियों के लिए कितना अलग हो सकता है।

अच्छी खबर यह है कि बीयर और वाइन पर एक्साइज ड्यूटी में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है, जिससे इन सेगमेंट में कीमतें स्थिर रहने की उम्मीद है।

यह फैसला महाराष्ट्र सरकार के लिए राजस्व बढ़ाने का एक अहम कदम है, लेकिन इसका सीधा असर शराब उद्योग की लाभप्रदता और उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता पर पड़ेगा। बाजार अब इन कंपनियों के अगले नतीजों और उपभोक्ता प्रतिक्रिया पर बारीकी से नजर रखेगा।

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