भारतीय शेयर बाजार में 'पैसों की बारिश': 4 महीने में $1 ट्रिलियन का रिकॉर्ड उछाल, पर क्या यह जश्न मनाने का समय है?
भारतीय शेयर बाजार में 'पैसों की बारिश': 4 महीने में $1 ट्रिलियन का रिकॉर्ड उछाल, पर क्या यह जश्न मनाने का समय है?
मार्च, 2025 से लेकर अब तक भारतीय शेयर बाजार ने एक अभूतपूर्व तेजी देखी है। भारत में लिस्टेड कंपनियों (BSE) का कुल मार्केट कैप इस दौरान लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर (यानी ₹83 लाख करोड़ से अधिक) बढ़ गया है, जो अब बढ़कर 5.33 ट्रिलियन डॉलर (लगभग ₹442 लाख करोड़) पर पहुँच गया है। यह उछाल विशेष रूप से उल्लेखनीय है क्योंकि इससे पहले अक्टूबर 2024 से फरवरी 2025 तक भारतीय मार्केट में लगातार पाँच महीने बिकवाली का भारी दबाव देखा गया था।
प्रतिशत के संदर्भ में देखें तो, भारतीय मार्केट में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप इस अवधि में 21% उछल गया, जो दुनिया के 10 सबसे बड़े इक्विटी मार्केट में सबसे अधिक है। इस तेजी के साथ, भारत अब अमेरिका, चीन, जापान और हॉन्ग कॉन्ग के बाद दुनिया का पाँचवाँ सबसे बड़ा इक्विटी मार्केट बन गया है। इस दौरान BSE सेंसेक्स 12.5% और निफ्टी 50 भी 13.5% मजबूत हुआ। ब्रॉडर मार्केट में, BSE मिडकैप 20.7% और BSE स्मॉलकैप 26% से अधिक ऊपर उछल गए, जो निवेशकों के उत्साह को दर्शाता है।
वैश्विक बाजारों से कहीं आगे भारत की रफ्तार:
यह भारतीय बाजार की असाधारण प्रदर्शन क्षमता को दर्शाता है, खासकर जब इसकी तुलना अन्य बड़े वैश्विक बाजारों से की जाती है:
जर्मनी: भारतीय बाजार के बाद सबसे अधिक तेजी जर्मनी के मार्केट में रही, जिसका मार्केट कैप करीब 14% बढ़ा।
कनाडा: इसके मार्केट कैप में करीब 11% की बढ़ोतरी हुई।
हॉन्ग कॉन्ग: 9% की तेजी दर्ज की गई।
जापान और यूनाइटेड किंगडम: दोनों के मार्केट कैप में 8-8% की वृद्धि हुई।
दुनिया के सबसे बड़े इक्विटी मार्केट अमेरिका का मार्केट कैप महज 2.4% बढ़ा, जबकि दूसरे सबसे बड़े मार्केट चीन की पूंजी 2.7% बढ़ी। फ्रांस के मार्केट कैप में 3.9% और ताइवान के मार्केट कैप में 3.2% की बढ़ोतरी हुई। यह आँकड़े भारतीय बाजार के अद्वितीय प्रदर्शन को और भी स्पष्ट करते हैं।
निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह: क्या वैल्यूएशन बहुत ज़्यादा है?
हालांकि, इस शानदार रिकवरी और रिकॉर्ड-तोड़ उछाल के बावजूद, कई विश्लेषक निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। मार्केट में आई इस तेज रिकवरी के चलते वैल्यूएशन फिर से ऊँचाई पर पहुँच गया है, और कुछ विश्लेषकों ने अर्निंग्स एस्टीमेट को डाउनग्रेड करना शुरू कर दिया है।
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के संजीव प्रसाद ने हाल ही में मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि भारतीय शेयर व्यापक रूप से ओवरवैल्यूड (overvalued) हैं। उनका मानना है कि खपत, निवेश और आईटी जैसे सेक्टर्स का वैल्यूएशन बढ़ा हुआ है, और कभी-कभी कमजोर अर्निंग्स ग्रोथ के बावजूद वे कोरोना-पूर्व स्तरों से भी अधिक हो जा रहे हैं। उनका मानना है कि राजस्व, मार्जिन और प्रतिस्पर्धा के चलते मुनाफे पर जोखिम बना हुआ है। संजीव प्रसाद के अनुसार, वित्तीय क्षेत्रों को छोड़कर अधिकांश सेक्टर महंगे दिख रहे हैं। उनका दृढ़ मत है कि जब ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा हो, तो ऐसे में वैल्यूएशन को सही स्तर पर आना बेहद ज़रूरी है।
यह निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है कि वर्तमान उत्साह में आँखें मूंदकर निवेश करने के बजाय, उन्हें कंपनियों के फंडामेंटल्स और वास्तविक वैल्यूएशन पर अधिक ध्यान देना चाहिए। क्या भारतीय बाजार अपनी मौजूदा ऊँचाइयों को बनाए रख पाएगा, या फिर एक करेक्शन अपेक्षित है, यह देखना दिलचस्प होगा।

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