भारत का पलटवार: अमेरिकी स्टील और एल्युमीनियम ड्यूटी पर जवाबी शुल्क का प्रस्ताव, WTO में दी चुनौती

भारत का पलटवार: अमेरिकी स्टील और एल्युमीनियम ड्यूटी पर जवाबी शुल्क का प्रस्ताव, WTO में दी चुनौती





भारत ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) में संयुक्त राज्य अमेरिका (US) द्वारा लगाए गए स्टील और एल्यूमीनियम पर अतिरिक्त शुल्क के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करते हुए शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है। सीएनबीसी-आवाज़ के लक्ष्मण रॉय ने इस खबर की जानकारी देते हुए बताया कि WTO ने भारत के इस प्रस्ताव का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। भारत ने WTO में अमेरिका द्वारा लगाए गए इन शुल्कों का कड़ा विरोध किया है और मांग की है कि इन्हें वापस लिया जाए। इस मामले में विचार-विमर्श करने या अमेरिका द्वारा ड्यूटी हटाने के लिए 30 दिन का समय दिया गया है।


भारत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि 30 दिनों के भीतर अमेरिका स्टील और एल्यूमीनियम पर बढ़ाई गई ड्यूटी वापस नहीं लेता है, तो भारत भी समान शुल्क लगाने के लिए बाध्य होगा। जानकारों का मानना है कि भारत के इस कदम से अमेरिका के लगभग 7.6 अरब डॉलर के निर्यात पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। गौरतलब है कि अमेरिका ने 8 मार्च, 2018 को कुछ स्टील और एल्यूमीनियम उत्पादों पर राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए क्रमशः 25% और 10% का सुरक्षा शुल्क लगाया था। यह नियम 23 मार्च, 2018 से प्रभावी हुआ था और 10 फरवरी, 2025 को अमेरिका ने इन सुरक्षा उपायों को संशोधित किया, जो 12 मार्च से अनिश्चित काल के लिए लागू हो गया है।


WTO में भारत का मजबूत पक्ष:


WTO में भारत के प्रस्ताव में अमेरिका के स्टील और एल्यूमीनियम पर जवाबी ड्यूटी लगाने की बात को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया है। भारत का कहना है कि अमेरिका द्वारा लगाया गया यह सुरक्षा शुल्क भारतीय उद्योगों को नुकसान पहुंचा रहा है, और जवाबी शुल्क लगाना इस नुकसान की भरपाई के लिए आवश्यक है। भारत ने तर्क दिया है कि वह सुरक्षा समझौते (Agreement on Safeguards - AoS) के तहत ऐसा कदम उठाने का पूर्ण अधिकार रखता है, खासकर तब जब अमेरिका के शुल्क भारतीय व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहे हैं।


भारत ने यह भी कहा है कि अमेरिका द्वारा उठाए गए कदम सामान्य टैरिफ और व्यापार समझौता (General Agreement on Tariffs and Trade - GATT) 1994 और AoS के नियमों के अनुरूप नहीं हैं। भारत का तर्क है कि AoS के तहत अनिवार्य विचार-विमर्श नहीं किया गया, जिसके कारण भारत को अमेरिकी व्यापार पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों के बराबर शुल्क लगाने का अधिकार मिल जाता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या दोनों देश इस व्यापार विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने में सफल होते हैं।

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