यस बैंक: निवेशकों को अंधेरे में रखा? SMBC डील पर SEBI की पैनी नजर
यस बैंक: निवेशकों को अंधेरे में रखा? SMBC डील पर SEBI की पैनी नजर
शेयर बाजार नियामक SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) ने यस बैंक द्वारा जापान की सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉर्पोरेशन (SMBC) को हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया में स्टॉक एक्सचेंजों को दी गई जानकारी की जांच शुरू कर दी है। इस सौदे की खबर सबसे पहले 6 मई को मीडिया में आई थी, जिसे यस बैंक ने तुरंत 'अटकल' और 'तथ्यात्मक रूप से गलत' बताकर खारिज कर दिया था।
लेकिन, ठीक तीन दिन बाद, 9 मई को यस बैंक ने अचानक खुलासा किया कि SMBC के साथ शेयर खरीद समझौता हो चुका है, जिसमें भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और अन्य मौजूदा निवेशक SMBC को अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। इस नाटकीय घटनाक्रम के बाद, SEBI इस बात की पड़ताल कर रहा है कि क्या 6 मई को यस बैंक को SMBC डील की जानकारी थी, और यदि हां, तो इसे 'अटकल' कहकर बाजार को क्यों गुमराह किया गया।
सूत्रों के अनुसार, SEBI विशेष रूप से यह जांच कर रहा है कि 6 मई को शेयर बाजार को दी गई जानकारी SEBI के लिस्टिंग नियमों का उल्लंघन तो नहीं करती है, खासकर तब जब उस दिन स्टॉक में 9% की तेज उछाल दर्ज की गई थी। नियामक यह समझने की कोशिश कर रहा है कि क्या बैंक के पास उस समय 'प्राइस सेंसिटिव' जानकारी थी जिसे सार्वजनिक नहीं किया गया।
यस बैंक की 9 मई की फाइलिंग के अनुसार, SBI लगभग 413 करोड़ शेयर SMBC को बेचेगा, जो बैंक की कुल इक्विटी का 13.9% है। इसके अतिरिक्त, HDFC बैंक, ICICI बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक भी क्रमशः 1.9%, 1.7% और 0.8% हिस्सेदारी बेचने के लिए सहमत हुए हैं। कुल मिलाकर, SMBC यस बैंक में 20% हिस्सेदारी का अधिग्रहण कर रहा है।
'प्राइस सेंसिटिव' जानकारी पर सवाल:
मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि SMBC के साथ हिस्सेदारी बिक्री की जानकारी स्पष्ट रूप से 'प्राइस सेंसिटिव' थी। सौदे की घोषणा के बाद से यस बैंक के शेयरों में लगभग 15% की वृद्धि हुई है, जो दर्शाता है कि इस जानकारी का निवेशकों पर सीधा प्रभाव पड़ा। SEBI के नियम ऐसे मामलों में समय पर, सटीक और गैर-भ्रामक जानकारी साझा करने की सख्त आवश्यकता रखते हैं।
इस मामले की सीधी जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने बताया, "SEBI के बाजार अफवाह सत्यापन नियमों के तहत चल रहे सौदों का सही खुलासा करना अनिवार्य है। 6 मई को यस बैंक की प्रतिक्रिया के तीन दिन के भीतर शेयर खरीद समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि सौदा एक उन्नत चरण में था।" सूत्र ने आगे कहा कि आमतौर पर डील संभालने वाले इन्वेस्टमेंट बैंकर और कानूनी सलाहकार सौदों के समय से पहले खुलासे से बचने की सलाह देते हैं, लेकिन 6 मई को सौदे की वास्तविक स्थिति की जांच करना आवश्यक है।
यस बैंक का विवादास्पद स्पष्टीकरण:
गौरतलब है कि 2020 में यस बैंक का नियंत्रण RBI ने अपने हाथ में ले लिया था, जब बैंक की वित्तीय स्थिति गंभीर रूप से खराब हो गई थी और इसके संस्थापक राणा कपूर पर गंभीर आरोप लगे थे। इसके बाद SBI, HDFC बैंक और अन्य बैंकों ने मिलकर यस बैंक को बचाया था। मार्च 2025 तक, SBI के पास 23.97% हिस्सेदारी थी, और कुल मिलाकर घरेलू बैंकों के पास 33.7% हिस्सेदारी थी। यस बैंक में लगभग 63 लाख खुदरा निवेशक हैं, जिससे यह शेयर किसी भी सकारात्मक या नकारात्मक खबर के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाता है।
खबर लिखे जाने तक यस बैंक और SEBI की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
यस बैंक मामले से जुड़ी मुख्य बातें:
मार्च 2020 में RBI ने यस बैंक का बोर्ड भंग कर दिया था।
SBI, HDFC बैंक और अन्य बैंकों ने मिलकर यस बैंक में हिस्सेदारी खरीदी थी।
यस बैंक के फाउंडर राणा कपूर को गिरफ्तार किया गया था और वह फिलहाल जमानत पर हैं।
मार्च 2025 तक SBI की हिस्सेदारी 23.97% थी।
यस बैंक में करीब 63 लाख रिटेल निवेशक हैं।
SMBC के साथ शेयर बिक्री समझौता 9 मई को हुआ, जिसमें SMBC को 20% हिस्सेदारी दी जा रही है।
SEBI की यह जांच निवेशकों के हितों की रक्षा और शेयर बाजार में पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मामले में आगे क्या खुलासे होते हैं।
.jpg)
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें