सेबी का 'बड़ा' फैसला: दिव्यांगों के लिए अब डिजिटल KYC होगा आसान, खुलेंगे निवेश के नए रास्ते!

सेबी का 'बड़ा' फैसला: दिव्यांगों के लिए अब डिजिटल KYC होगा आसान, खुलेंगे निवेश के नए रास्ते!


बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने दिव्यांगजनों के लिए एक महत्वपूर्ण और प्रगतिशील निर्णय लिया है। अब सभी विनियमित संस्थाओं (Regulated Entities) को दिव्यांग व्यक्तियों के लिए डिजिटल 'अपने ग्राहक को जानें' (Know Your Customer - KYC) सुविधा प्रदान करनी होगी। सेबी ने इस सुविधा को विस्तार से समझाने के लिए एक 'अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न' (FAQ) दस्तावेज़ भी जारी किया है, जिससे प्रक्रिया और भी स्पष्ट हो सकेगी।


यह फैसला दिव्यांग व्यक्तियों को वित्तीय बाजारों में अधिक आसानी से भाग लेने में मदद करेगा, जिससे उनके लिए निवेश के नए रास्ते खुलेंगे।


अभिभावक के हस्ताक्षर से भी खुलेगा खाता, मिलेगी डिजिटल KYC सुविधा

सेबी के नए दिशानिर्देशों के अनुसार, यदि कोई दिव्यांग व्यक्ति स्वयं हस्ताक्षर करने में असमर्थ है, तो उसके अभिभावक (Guardian) के हस्ताक्षर से भी खाता खोला जा सकता है। हालांकि, इस स्थिति में अभिभावक और दिव्यांग व्यक्ति दोनों को लागू KYC नियमों का पालन करना होगा।


सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ऐसे व्यक्तियों को ऑनलाइन या डिजिटल KYC की सुविधा प्रदान की जाएगी। इसका मतलब है कि यदि कोई दिव्यांग क्लाइंट ऑनलाइन या डिजिटल KYC का अनुरोध करता है, तो मध्यस्थ (Intermediary) को लाइव वातावरण में वीडियो कैप्चरिंग सुविधा प्रदान करनी होगी।


वीडियो KYC में 'झपकियां' नहीं, तो भी चलेगा काम!

सेबी ने वीडियो KYC प्रक्रिया को दिव्यांग व्यक्तियों के लिए और अधिक समावेशी बनाने के लिए भी प्रावधान किए हैं। FAQ में कहा गया है कि यदि दिव्यांग व्यक्ति वीडियो KYC के दौरान अपनी सजीवता (liveness) के सत्यापन के लिए आंखें नहीं झपका पाता है, तो मध्यस्थ अन्य मापदंडों का भी उपयोग कर सकते हैं। इनमें शामिल हैं:


फेशियल एक्सप्रेशंस (चेहरे के हावभाव)

सिर हिलाना

स्क्रीन पर क्लाइंट द्वारा साफ तौर पर ओटीपी (OTP) दिखाना

रियल-टाइम वीडियो रिकॉर्डिंग

स्क्रीन पर दस्तावेजों की कॉपी दिखाना

ये लचीले नियम यह सुनिश्चित करेंगे कि सत्यापन प्रक्रिया दिव्यांग व्यक्तियों के लिए बाधा न बने।


ई-सिग्नेचर और अंगूठे के निशान को मिलेगी मान्यता

सेबी ने यह भी स्पष्ट किया है कि 'नो योर क्लाइंट' (KYC) सत्यापन और खाता-आधारित संबंधों के दौरान मध्यस्थों द्वारा किया जाएगा। यह सर्कुलर विशेष रूप से दिव्यांग लोगों के मामलों पर लागू होगा। मध्यस्थों को सेंट्रल KYC रजिस्ट्री से डाउनलोड की गई KYC जानकारी पर निर्भर रहना होगा, जिसके लिए दिव्यांग व्यक्ति की सहमति अनिवार्य है।


एक महत्वपूर्ण बदलाव यह भी है कि यदि पेज पर सभी दस्तावेजों के साथ ई-सिग्नेचर किया गया है, तो निवेशक के अंगूठे के निशान (thumb impression) को भी स्वीकार किया जा सकता है। यह कदम उन लोगों के लिए प्रक्रिया को और आसान बनाएगा जो इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर का उपयोग करने में असमर्थ हैं।


यह सेबी का एक सराहनीय कदम है जो वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देगा और दिव्यांगजनों को देश के पूंजी बाजार में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए सशक्त बनाएगा।

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