भारत-यूके FTA का 'जाम': क्या स्कॉच के साथ आपकी जेब पर भी पड़ेगा असर?

भारत-यूके FTA का 'जाम': क्या स्कॉच के साथ आपकी जेब पर भी पड़ेगा असर?



ऑफिसर्स च्वाइस (Officer's Choice) जैसे लोकप्रिय ब्रांडों की निर्माता कंपनी एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स (Allied Blenders and Distillers - ABDL) के शेयरों में पिछले आठ सत्रों में 30% से अधिक की तेजी दर्ज की गई है, हालांकि 16 मई की दोपहर तक इसमें 2% की गिरावट देखी गई। इस उछाल का मुख्य कारण भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच 6 मई को हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से कंपनी को होने वाले संभावित लाभ की उम्मीद है।


CNBC-TV18 के साथ एक विशेष बातचीत में, एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स के प्रबंध निदेशक (MD) आलोक गुप्ता ने इस समझौते को कंपनी के लिए 'गेम-चेंजर' बताया। उन्होंने कहा कि भारत-यूके FTA से कंपनी के लाभ मार्जिन में निश्चित रूप से वृद्धि होगी। गुप्ता ने बताया, "भारत में हमारा वर्तमान निर्यात शुल्क लगभग ₹150 करोड़ है। नया टैरिफ लागू होने के बाद, हमें लगभग ₹75 करोड़ की शुल्क छूट या माल की लागत में कमी आने की उम्मीद है।"


₹1000 करोड़ के निवेश की तैयारी में ABDL:

कंपनी के MD आलोक गुप्ता ने भविष्य की योजनाओं पर भी रोशनी डाली। उन्होंने बताया कि बोर्ड ने कंपनी के लिए ₹1,000 करोड़ की धनराशि जुटाने की योजना को मंजूरी दे दी है। यह निवेश कंपनी की उत्पादन क्षमता बढ़ाने और लागत को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वर्तमान में, ABDL अपनी एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल (ENA) की लगभग एक तिहाई आवश्यकता अपनी रंगपुर डिस्टिलरी से पूरी करती है। इसके अतिरिक्त, तेलंगाना में एक नया माल्ट निर्माण संयंत्र भी स्थापित किया जा रहा है। कंपनी का अनुमान है कि ये दोनों इकाइयां मिलकर कंपनी के लाभ मार्जिन में 200 से 300 बेसिस पॉइंट तक का सुधार कर सकती हैं।


गुप्ता ने आगे कहा, "हम तीसरे निवेश की भी घोषणा जल्द करेंगे, जिसकी हमें आवश्यकता है। हमारा 100% कैप्टिव होने का इरादा पूरी तरह से सही दिशा में बढ़ रहा है।" कैप्टिव उत्पादन का अर्थ है कि कंपनी अपनी अधिकांश कच्ची माल की जरूरतों को स्वयं ही पूरा करेगी, जिससे लागत और आपूर्ति श्रृंखला पर बेहतर नियंत्रण होगा।


भारत-यूके FTA निश्चित रूप से स्कॉच व्हिस्की आयात करने वाली कंपनियों के लिए लागत कम करने में मददगार साबित होगा। एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स जैसी कंपनियां, जो ब्लेंडेड स्कॉच व्हिस्की बनाती हैं, उन्हें आयातित स्कॉच सस्ता मिलने से फायदा होगा। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस लागत में कमी का फायदा उपभोक्ताओं तक पहुंचता है और क्या भारतीय बाजार में स्कॉच व्हिस्की की कीमतें भी कम होती हैं। विश्लेषकों का मानना है कि शुरुआती तौर पर कीमतों में थोड़ी कमी देखने को मिल सकती है, लेकिन राज्य करों और अन्य शुल्कों के कारण यह कमी बहुत अधिक नहीं होगी। फिर भी, यह FTA भारतीय उपभोक्ताओं के लिए प्रीमियम स्कॉच व्हिस्की को अधिक सुलभ बना सकता है।

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