इंडसइंड बैंक में गड़बड़ी की आंच: CEO समेत 25 कर्मचारी घेरे में, ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा

इंडसइंड बैंक में गड़बड़ी की आंच: CEO समेत 25 कर्मचारी घेरे में, ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा



इंडसइंड बैंक में डेरिवेटिव इंस्ट्रूमेंट्स से जुड़े अकाउंटिंग में हुई अनियमितताओं के मामले में गाज गिरनी शुरू हो गई है। ग्रांट थॉर्नटन की फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट में बैंक के प्रबंध निदेशक (MD) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सुमंत कठपालिया और उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी (डिप्टी CEO) अरुण खुराना समेत कुल 25 कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराया गया है। इस मामले से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी है।


रिपोर्ट के अनुसार, इन 25 कर्मचारियों में ज्यादातर ट्रेजरी डिपार्टमेंट के सदस्य हैं, जिनमें ट्रेजरी हेड और कुछ अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं।


कुछ कर्मचारियों ने पहले ही दी थी मैनेजमेंट को जानकारी:


सूत्रों ने यह भी बताया कि ग्रांट थॉर्नटन की रिपोर्ट में जिन लोगों को अकाउंटिंग अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार पाया गया है, वे बैंक के विभिन्न विभागों से हैं। दिलचस्प बात यह है कि ट्रेजरी डिपार्टमेंट के कुछ वरिष्ठ कर्मचारियों ने बैंक की अकाउंटिंग प्रक्रियाओं में गड़बड़ियों की जानकारी पहले ही मैनेजमेंट को दे दी थी। एक सूत्र ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "इस बात को साबित करने के लिए पर्याप्त कम्युनिकेशन ट्रेल मौजूद है कि मैनेजमेंट को अकाउंटिंग में होने वाली संभावित गलतियों के बारे में सूचित किया गया था।"


आधे कर्मचारियों पर गिर सकती है नौकरी की तलवार:


रिपोर्ट में दोषी पाए गए कर्मचारियों में से कुछ की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है, जबकि जिन्होंने पहले मैनेजमेंट को अनियमितताओं की जानकारी दी थी, उनकी नौकरी बचने की संभावना है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ग्रांट थॉर्नटन की रिपोर्ट के बाद बैंक कितने कर्मचारियों को नौकरी से निकाल सकता है। एक बैंकर ने गुमनाम रहने की शर्त पर बताया कि जांच रिपोर्ट में शामिल लगभग 50% कर्मचारियों की नौकरी बरकरार रह सकती है, लेकिन उन्हें अलग-अलग विभागों में स्थानांतरित किया जा सकता है।


इस मामले में इंडसइंड बैंक और ग्रांट थॉर्नटन को भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं मिला है।


गौरतलब है कि 10 मार्च को इंडसइंड बैंक के मैनेजमेंट ने, CEO सुमंत कठपालिया के नेतृत्व में, डेरिवेटिव इंस्ट्रूमेंट्स में अकाउंटिंग अनियमितताओं का खुलासा किया था। कठपालिया ने यह भी कहा था कि यह मुद्दा पिछले सात वर्षों से चला आ रहा था। सूत्रों ने यह भी संकेत दिया था कि ये अनियमितताएं जापान के कुछ ऐसे पेन कॉन्ट्रैक्ट्स से जुड़ी थीं जिनकी हेजिंग नहीं की गई थी, जिसके बाद बैंक के शेयरों में बड़ी गिरावट आई थी। अब ऑडिट रिपोर्ट में शीर्ष अधिकारियों सहित 25 कर्मचारियों की पहचान होने के बाद, बैंक प्रबंधन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।

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