बाजार पर भरोसा रखें: भारत-पाक तनाव क्षणिक, भारतीय बाजार की ताकत अटूट - समीर अरोड़ा
बाजार पर भरोसा रखें: भारत-पाक तनाव क्षणिक, भारतीय बाजार की ताकत अटूट - समीर अरोड़ा
पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव के बीच, क्या आपके शेयर निवेश को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं? यदि हां, तो आपको दिग्गज फंड मैनेजर और हेलियस कैपिटल के संस्थापक समीर अरोड़ा की राय पर ध्यान देना चाहिए। बाजार के दशकों के अनुभव के साथ, अरोड़ा ने निवेशकों को आश्वस्त किया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच खुले युद्ध की संभावना मात्र 1% है, हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि निवेशकों के लिए इस स्थिति का अनुमान लगाना कठिन है।
भारत: वैश्विक निवेश का सबसे आकर्षक गंतव्य:
अरोड़ा ने भारतीय बाजारों की अंतर्निहित रिकवरी क्षमता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच मौजूदा तनाव अल्पकालिक है। दीर्घकालिक निवेश परिप्रेक्ष्य से देखें तो, भारत वैश्विक स्तर पर सबसे मजबूत और आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में उभरा है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के साथ बढ़ते टकराव के बावजूद, यह स्थिति वास्तव में 'इंडिया थीम' को और मजबूत कर रही है। निवेशकों को यह विश्वास रखना होगा कि स्थिति नियंत्रण में रहेगी और चीजें जल्द ही सामान्य हो जाएंगी।
विदेशी और घरेलू निवेशकों का अटूट समर्थन:
अरोड़ा ने पिछले दो वर्षों में भारतीय बाजारों को मिले स्थानीय निवेशकों के मजबूत समर्थन पर प्रकाश डाला। इस अवधि के दौरान, विदेशी निवेशकों ने बिकवाली की, लेकिन घरेलू निवेशकों ने बाजार को संभाले रखा। अब, यदि विदेशी निवेशक अपनी बिकवाली रोक देते हैं और खरीदारी शुरू कर देते हैं, तो भारतीय बाजारों को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक पाएगा। उन्होंने 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद अमेरिकी स्टॉक बाजारों में लगभग 20 ट्रिलियन डॉलर के निवेश का उदाहरण दिया। अरोड़ा का मानना है कि अगर इस राशि का एक हिस्सा, मान लीजिए 5 ट्रिलियन डॉलर भी निकलता है, तो वैश्विक बाजारों में एक बड़ा निवेश प्रवाह आएगा, और भारत उस महत्वपूर्ण हिस्से को आकर्षित करने के लिए एक मजबूत स्थिति में है।
अरोड़ा की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव बढ़ गया है, जिससे निवेशकों की चिंताएं स्वाभाविक हैं। हालांकि, एक अनुभवी फंड मैनेजर का यह आशावादी दृष्टिकोण निवेशकों को शांत रहने और भारतीय बाजार की दीर्घकालिक संभावनाओं पर विश्वास बनाए रखने का सुझाव देता है। उनके अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव क्षणिक हो सकता है, लेकिन भारतीय बाजार की विकास गाथा अटूट है, जिसे घरेलू और संभावित रूप से वापस आने वाले विदेशी निवेशकों का समर्थन मिलता रहेगा।
.jpg)
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें