दीपक शेनॉय का मंत्र: भू-राजनीतिक उथल-पुथल में भी निवेश के अवसर, लंबी अवधि का नजरिया रखें

दीपक शेनॉय का मंत्र: भू-राजनीतिक उथल-पुथल में भी निवेश के अवसर, लंबी अवधि का नजरिया रखें



भारत और पाकिस्तान के बीच जारी सैन्य तनाव के माहौल के बीच, शेयर बाजार में अस्थिरता का दौर देखने को मिल रहा है। भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई के बाद सीमा पर तनाव चरम पर है और प्रधानमंत्री मोदी स्वयं स्थिति पर कड़ी नजर रख रहे हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने अर्धसैनिक बलों के प्रमुखों के साथ उच्च-स्तरीय बैठक की है, जबकि रक्षा मंत्री ने भी शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ सीमा सुरक्षा और सैन्य तैयारियों की समीक्षा की है।


इन संवेदनशील परिस्थितियों के बीच, निवेशकों के लिए बाजार की दिशा और अपनी निवेश रणनीति को लेकर चिंताएं बढ़ना स्वाभाविक है। इस संदर्भ में, कैपिटल माइंड के संस्थापक और सीईओ दीपक शेनॉय ने निवेशकों को एक अलग दृष्टिकोण प्रदान किया है। उन्होंने कहा है कि मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति पिछली बार से काफी अलग है, लेकिन यदि हालात में जल्द सुधार होता है और सैन्य संघर्ष विराम होता है, तो बाजार में तेजी से रिकवरी देखने को मिल सकती है।


शेनॉय ने ऐतिहासिक आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि सीमित युद्ध की स्थिति में अर्थव्यवस्था को अप्रत्याशित रूप से बढ़ावा मिल सकता है, क्योंकि सरकार से कंपनियों को बड़े पैमाने पर ऑर्डर मिलते हैं। हालांकि, उन्होंने नैतिक दृष्टिकोण से युद्ध को अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक कहना अनुचित बताया, लेकिन पुराने आंकड़ों के विश्लेषण से यही रुझान सामने आता है कि यदि संघर्ष सीमित रहे तो अर्थव्यवस्था में तेजी आ सकती है।


खरीदारी के अच्छे मौके, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए रणनीति:


दीपक शेनॉय ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे इस बाजार की उथल-पुथल को खरीदारी के एक अच्छे अवसर के रूप में देखें। उन्होंने निवेशकों को लंबी अवधि का नजरिया रखने और संभावित रूप से 30% तक की गिरावट सहने के लिए तैयार रहने का सुझाव दिया है। उनका मानना है कि बाजार में इस तरह की अस्थिरता के दौरान गुणवत्ता वाले शेयरों को आकर्षक मूल्यांकन पर खरीदने का मौका मिलता है, जो लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न दे सकते हैं।


शेनॉय का यह दृष्टिकोण निवेशकों को अल्पकालिक बाजार के झटकों से विचलित न होकर, धैर्य बनाए रखने और मजबूत बुनियादी सिद्धांतों वाली कंपनियों में निवेशित रहने की सलाह देता है। उनका मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव अस्थायी हो सकता है, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास क्षमता और मजबूत कंपनियों के दीर्घकालिक प्रदर्शन में विश्वास रखना महत्वपूर्ण है। इसलिए, निवेशकों को मौजूदा गिरावट को पैनिक सेलिंग के बजाय एक रणनीतिक खरीदारी के अवसर के रूप में देखना चाहिए।

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