भारत-पाक तनाव: घबराएं नहीं, भारत की मजबूत आर्थिक नींव और बाजार की वापसी पर भरोसा रखें - गुरमीत चड्ढा

भारत-पाक तनाव: घबराएं नहीं, भारत की मजबूत आर्थिक नींव और बाजार की वापसी पर भरोसा रखें - गुरमीत चड्ढा



भारत और पाकिस्तान के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच निवेशकों को अपनी रणनीति को लेकर चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। यह कहना है कंप्लीट सर्कल के मैनेजिंग पार्टनर और सीआईओ गुरमीत चड्ढा का। उन्होंने निवेशकों को आश्वस्त किया है कि भारत पूरी तरह से तैयार है और देश की सुरक्षा तथा बाजार दोनों को लेकर घबराने की कोई जरूरत नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया कि इस तनाव के बीच बाजार में कुछ अस्थिरता देखने को मिल सकती है।


चड्ढा ने कहा कि जब भी कोई सैन्य कार्रवाई होती है, तो बाजार पर उसका थोड़ा प्रभाव पड़ता है। लेकिन इतिहास गवाह है कि जब भी ऐसी घटनाएं समाप्त होती हैं, तो बाजार बहुत शानदार वापसी करता है। ठीक उसी तरह, भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम होने के बाद बाजार में तेजी आएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की व्यापक आर्थिक स्थिति (मैक्रो पिक्चर) काफी मजबूत है, इसलिए बाजार में डरने की कोई आवश्यकता नहीं है।


अपनी बातचीत को आगे बढ़ाते हुए गुरमीत चड्ढा ने कहा कि भारत ने पिछले 8-10 वर्षों में रक्षा क्षेत्र पर बहुत अधिक ध्यान केंद्रित किया है। वैश्विक स्तर पर रक्षा उत्पादों की मांग में काफी वृद्धि हुई है, और भारतीय रक्षा कंपनियों को निर्यात ऑर्डर में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है। ऐसे में, रक्षा क्षेत्र में चयनात्मक होने की आवश्यकता है। इसके अलावा, ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन) क्षेत्र के खिलाड़ियों पर भी ध्यान देना महत्वपूर्ण है। चड्ढा ने माना कि रक्षा क्षेत्र में अल्पकालिक प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है, लेकिन इस क्षेत्र में लंबी अवधि के लिए निवेश करना फायदेमंद साबित हो सकता है।


गुरमीत चड्ढा ने यह भी बताया कि एचएएल (HAL), जेन टेक्नोलॉजीज (Zen Technologies), सोलर इंडस्ट्रीज (Solar Industries) और भारत फोर्ज (Bharat Forge) जैसे शेयर उनके पोर्टफोलियो का हिस्सा हैं और इन पर उनका सकारात्मक दृष्टिकोण बना हुआ है।


इस बीच, व्हाइट ओक ग्रुप के संस्थापक प्रशांत खेमका ने बाजार के दृष्टिकोण से थोड़ी अनिश्चितता का माहौल स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि बाजार में अनिश्चितता के माहौल में अल्पकालिक अस्थिरता देखने को मिलती है। हालांकि, खेमका का भी मानना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव लंबे समय तक नहीं चलेगा, जैसा कि 2016 और 2019 में हुई परिस्थितियां इसका उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि अगर तनाव की स्थिति ज्यादा नहीं बढ़ती है तो बाजार पर कोई बड़ी गिरावट नहीं होगी।


खेमका ने आगे कहा कि अगर बाजार को ऐसा लगता है कि भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ता तनाव नियंत्रण से बाहर हो रहा है, तो बाजार में 10% तक की गिरावट संभव है, और यह गिरावट भी डर के कारण देखने को मिलेगी। स्थिति नियंत्रण में आने के बाद गिरावट नहीं होगी। ऐसे में, उनका सुझाव है कि बाजार में निवेशित रहना एक बेहतर रणनीति है।


कुल मिलाकर, दोनों विशेषज्ञों का यही मानना है कि मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद निवेशकों को घबराना नहीं चाहिए। भारत की मजबूत आर्थिक नींव और अतीत के अनुभवों को देखते हुए, जैसे ही तनाव कम होता है, बाजार में तेजी से सुधार की उम्मीद की जा सकती है। निवेशकों को लंबी अवधि का नजरिया रखना चाहिए और गुणवत्ता वाले शेयरों में निवेशित रहना चाहिए।

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