भारती एयरटेल: 'नया पेट्रोल' जो छापेगा पैसा? टेलीकॉम सेक्टर में क्यों दिख रहा बंपर रिटर्न का मौका!

भारती एयरटेल: 'नया पेट्रोल' जो छापेगा पैसा? टेलीकॉम सेक्टर में क्यों दिख रहा बंपर रिटर्न का मौका!


क्या आप भी मानते हैं कि मोबाइल रिचार्ज अब पेट्रोल की तरह एक ऐसा खर्च बन गया है जिससे बचा नहीं जा सकता? अगर हां, तो टेलीकॉम सेक्टर, खासकर भारती एयरटेल, आपके लिए 'पैसा छापने की मशीन' साबित हो सकता है! बीएनपी पारिबा के इंडिया इक्विटी रिसर्च हेड, कुणाल वोरा का मानना है कि टेलीकॉम अब नए ज़माने का 'पेट्रोल' है, और इसमें निवेश करना फायदे का सौदा है।


कुणाल वोरा ने भारती एयरटेल के शानदार रिटर्न का हवाला देते हुए कहा है कि टेलीकॉम कंपनियों द्वारा टैरिफ में किए गए इजाफे पर ग्राहकों की प्रतिक्रिया से साफ है कि अब मोबाइल रिचार्ज को एक अनिवार्य खर्च के तौर पर देखा जा रहा है, भले ही इसकी कीमतें बढ़ें।


टैरिफ में बढ़ोतरी अब कंपनियों के लिए 'मुश्किल नहीं'

इस नई स्थिति ने टेलीकॉम कंपनियों के लिए एक बड़ा अवसर पैदा किया है। अब वे अपनी लागत के हिसाब से टैरिफ बढ़ा सकती हैं, जिससे उनके राजस्व (रेवेन्यू) में सीधे तौर पर वृद्धि होगी। वोरा के अनुसार, भारतीय टेलीकॉम इंडस्ट्री की मौजूदा तस्वीर में भारती एयरटेल में निवेश करना बेहद आकर्षक लगता है।


उन्होंने समझाया कि टेलीकॉम अब कुछ साल पहले के मुकाबले काफी अलग सेक्टर बन गया है। एक समय था जब इस इंडस्ट्री में ढेर सारे प्लेयर्स थे और उनके बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा थी, जिससे टैरिफ बहुत कम थे। लेकिन आज, इस सेक्टर में केवल दो बड़ी कंपनियां (एयरटेल और जियो) रह गई हैं, जबकि वोडाफोन आइडिया की स्थिति अच्छी नहीं है।


नए प्लेयर्स की एंट्री मुश्किल, एयरटेल को फायदा!

वोरा का कहना है कि आज अगर कोई नई कंपनी टेलीकॉम सेक्टर में एंट्री करना चाहती है, तो उसे कम से कम 25 अरब डॉलर (लगभग ₹2 लाख करोड़) खर्च करने पड़ेंगे। इससे भी बड़ी बात, अब स्पेक्ट्रम भी आसानी से उपलब्ध नहीं है। स्पेक्ट्रम की इस कमी ने भारती एयरटेल जैसी मौजूदा कंपनियों को हर दो साल पर टैरिफ बढ़ाने की क्षमता दी है।


वोरा ने बताया, "आज टैरिफ में इजाफे से भारती एयरटेल जैसी कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ 18-19 फीसदी रह सकती है। टैरिफ में इजाफा नहीं करने पर भी यह ग्रोथ 8-9 फीसदी रह सकती है। इस तरह कंपाउंडिंग सीएजीआर के लिहाज से यह 13-14 फीसदी ग्रोथ होगी।" यह एक मजबूत और स्थिर विकास दर है, जो निवेशकों को आकर्षित कर सकती है।


ARPU एक दशक में सबसे ज़्यादा, उपयोगिता बेजोड़

वैल्यूएशन के बारे में बात करते हुए वोरा ने स्वीकार किया कि डिस्काउंटेड कैश फ्लो (DCF) मॉडल के आधार पर टेलीकॉम कंपनियों का वैल्यूएशन ज़्यादा दिख सकता है। लेकिन, भारत में कई सेक्टर्स में DCF मॉडल हमेशा सही तस्वीर नहीं दिखाता, क्योंकि यहां मार्केट प्राइसिंग और वास्तविक वैल्यूएशंस के बीच अंतर होता है। उन्होंने इसके बजाय कंपनियों की संरचनात्मक मजबूती (structural strength) पर ध्यान देने की सलाह दी।


आज टेलीकॉम कंपनियों का औसत राजस्व प्रति उपयोगकर्ता (ARPU) एक दशक में सबसे ज्यादा है। वोरा ने अंत में एक महत्वपूर्ण बात कही: "अगर आप टेलीकॉम सर्विस की उपयोगिता के बारे में सोचें तो इसके बिना आपका काम नहीं चल सकता है।" यह दर्शाता है कि मोबाइल सेवाएं अब एक बुनियादी आवश्यकता बन गई हैं, जिससे टेलीकॉम कंपनियों के लिए राजस्व का एक स्थिर और बढ़ता स्रोत सुनिश्चित होता है।


क्या आप भी इस नए 'पेट्रोल' में निवेश करने का विचार कर रहे हैं?

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