बाजार में भूचाल: भारत-पाक तनाव के बीच निवेशकों के लिए क्या हो रणनीति?

बाजार में भूचाल: भारत-पाक तनाव के बीच निवेशकों के लिए क्या हो रणनीति?



शुक्रवार, 9 मई को शेयर बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई। पाकिस्तान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव, जिसमें 8 मई की रात को पहले पाकिस्तान के हमले और फिर भारत की जवाबी कार्रवाई शामिल है, का सीधा असर निवेशकों के सेंटिमेंट पर पड़ा। दोपहर 2 बजे तक सेंसेक्स 888 अंक यानी 1.11% गिरकर 79,442 पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 282 अंक यानी 1.17% की गिरावट के साथ 23,990 पर था। इस भारी उथल-पुथल के बीच निवेशकों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि उनकी निवेश रणनीति कैसी होनी चाहिए? क्या उन्हें अपना निवेश बनाए रखना चाहिए या मौजूदा डर के माहौल में पैसे निकाल लेना चाहिए?


अल्पकालिक अस्थिरता संभव:


विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि पाकिस्तान के साथ तनाव कम होते ही बाजार में तेजी से सुधार देखने को मिल सकता है। इसके अतिरिक्त, अमेरिका के साथ व्यापार शुल्कों को लेकर थोड़ी अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है। यदि भारत और अमेरिका व्यापार शुल्कों (US Tariff) पर किसी समझौते पर पहुंचते हैं, तो यह बाजार के लिए एक बड़ा सकारात्मक उत्प्रेरक साबित हो सकता है। अब तक आए चौथी तिमाही के नतीजे मिश्रित रहे हैं, जिसमें कुछ कंपनियों ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है। इन कारकों को देखते हुए, बाजार को लेकर अत्यधिक चिंता का कोई बड़ा कारण फिलहाल दिखाई नहीं दे रहा है।


हेज फंड बनाम दीर्घकालिक निवेशक:


मार्केट एक्सपर्ट सुनील सुब्रमण्यम ने मौजूदा बाजार परिदृश्य पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अल्पकालिक तौर पर बाजार में बिकवाली का दबाव दिख सकता है। उनके अनुसार, शॉर्ट-टर्म हेज फंड और लंबी अवधि के सॉवरेन वेल्थ फंड और पेंशन फंड के बीच एक तरह की खींचतान चल रही है। हेज फंडों ने कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अमेरिका में ब्याज दरों में संभावित कमी का लाभ उठाने के लिए भारत में निवेश किया था, और अब वे मुनाफावसूली कर रहे हैं। बाजार में यह उतार-चढ़ाव कब तक जारी रहेगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि बेहतर वैल्यूएशन के लिए लंबी अवधि के निवेशक कब तक इंतजार करते हैं।


निवेश बनाए रखने की सलाह:


सुब्रमण्यम का स्पष्ट मत है कि जिन निवेशकों ने पहले से ही बाजार में निवेश किया हुआ है, उन्हें अपना निवेश बनाए रखना चाहिए। उन्हें घबराहट में आकर बिकवाली करने से बचने की सलाह दी जाती है। वे बिकवाली के बारे में तभी सोचें जब उन्हें वास्तव में पैसे की आवश्यकता हो। जिन निवेशकों के पास अतिरिक्त नकदी (कैश) उपलब्ध है, वे मौजूदा गिरावट का फायदा उठाते हुए धीरे-धीरे उसे बाजार में निवेश करने पर विचार कर सकते हैं। सुब्रमण्यम का मानना है कि वर्तमान में लार्ज-कैप और मिड-कैप स्टॉक्स में निवेश करना अपेक्षाकृत सुरक्षित और फायदेमंद हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि बैंकिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र (BFSI) और कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी स्टॉक आकर्षक दिख रहे हैं।


कुल मिलाकर, विशेषज्ञों का सुझाव है कि भू-राजनीतिक तनाव के कारण होने वाली अल्पकालिक बाजार अस्थिरता से निवेशकों को घबराना नहीं चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों को अपने निवेश को बनाए रखना चाहिए, जबकि जिनके पास अतिरिक्त पूंजी है, वे सावधानीपूर्वक और चरणबद्ध तरीके से निवेश करने पर विचार कर सकते हैं, खासकर आकर्षक वैल्यूएशन वाले लार्ज-कैप और मिड-कैप शेयरों में।

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