मनोज ज्वैलर्स की निराशाजनक लिस्टिंग, निवेशकों को लगा लोअर सर्किट का झटका
मनोज ज्वैलर्स की निराशाजनक लिस्टिंग, निवेशकों को लगा लोअर सर्किट का झटका
सोने और हीरे के आभूषणों के खुदरा विक्रेता, मनोज ज्वैलर्स, की आज बीएसई के एसएमई प्लेटफॉर्म पर निराशाजनक शुरुआत हुई। आईपीओ मूल्य से नीचे सूचीबद्ध होने के बाद, शेयर तेजी से गिरकर लोअर सर्किट पर पहुंच गया, जिससे आईपीओ निवेशकों को करारा झटका लगा। गौरतलब है कि कंपनी का आईपीओ कुल मिलाकर 1.14 गुना सब्सक्राइब हुआ था।
आईपीओ के तहत ₹54 प्रति शेयर के भाव पर जारी हुए शेयरों की लिस्टिंग आज बीएसई एसएमई पर ₹53.95 पर हुई। इसका मतलब है कि आईपीओ निवेशकों को लिस्टिंग पर कोई लाभ नहीं मिला, बल्कि उनकी पूंजी में मामूली गिरावट आई। निवेशकों को असली झटका तब लगा जब शेयर में और गिरावट आई और यह ₹51.26 के लोअर सर्किट पर पहुंच गया। इस स्तर पर, आईपीओ निवेशक अपनी निवेशित राशि पर 5.07 प्रतिशत का नुकसान झेल रहे हैं।
कहां खर्च होगा आईपीओ का पैसा?
मनोज ज्वैलर्स का ₹16.20 करोड़ का आईपीओ 5 से 7 मई तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों से कमजोर प्रतिक्रिया मिली थी और यह केवल 1.14 गुना ही सब्सक्राइब हो पाया था। खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित आधा हिस्सा 1.01 गुना भरा था। इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 30 लाख नए शेयर जारी किए गए थे। कंपनी ने इन शेयरों के जरिए जुटाए गए धन में से ₹13.23 करोड़ का उपयोग कर्ज चुकाने और ₹1.68 करोड़ का उपयोग सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए करने की योजना बनाई है।
मनोज ज्वैलर्स के बारे में
वर्ष 2007 में स्थापित मनोज ज्वैलर्स सोने और हीरे के आभूषणों के खुदरा व्यापार में सक्रिय है। कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुआ है। वित्त वर्ष 2022 में कंपनी ने ₹36 लाख का शुद्ध लाभ दर्ज किया था, जो अगले वित्त वर्ष 2023 में बढ़कर ₹62 लाख और वित्त वर्ष 2024 में ₹3.24 करोड़ हो गया। इस अवधि के दौरान, कंपनी का राजस्व सालाना 153 प्रतिशत से अधिक की चक्रवृद्धि दर (CAGR) से बढ़कर ₹43.38 करोड़ तक पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष 2024-25 की बात करें तो अप्रैल-दिसंबर 2024 के बीच कंपनी ने ₹3.77 करोड़ का शुद्ध लाभ और ₹42.97 करोड़ का राजस्व हासिल किया था।
कंपनी के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के बावजूद, आईपीओ की निराशाजनक लिस्टिंग निवेशकों के लिए एक चिंता का विषय बन गई है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि कमजोर सब्सक्रिप्शन और ग्रे मार्केट प्रीमियम में उत्साह की कमी लिस्टिंग पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे आगे की बाजार चाल पर नजर रखें और सोच-समझकर निर्णय लें।
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