टेलीकॉम कंपनियों के लिए 'खुला आसमान': 6 GHz बैंड हुआ फ्री, 5G का 'सुपरचार्ज' तय!
टेलीकॉम कंपनियों के लिए 'खुला आसमान': 6 GHz बैंड हुआ फ्री, 5G का 'सुपरचार्ज' तय!
टेलीकॉम सेक्टर में क्रांति की आहट! सरकार ने टेलीकॉम उपकरण निर्माताओं और ऑपरेटरों के लिए एक बड़ा तोहफा दिया है। अब 5925 – 6425 MHz बैंड का इस्तेमाल बिना किसी लाइसेंस और शुल्क के किया जा सकेगा।
CNBC-आवाज़ के असीम मनचंदा ने इस फैसले के महत्व को बताते हुए कहा कि यह कदम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक सर्जरी, ई-हेल्थ, ऑगमेंटेड रियलिटी (AR), वर्चुअल रियलिटी (VR) वीडियो गेम्स जैसे भविष्य की तकनीकों के विकास को गति देगा।
डी-लाइसेंसिंग का अर्थ और प्रभाव:
डी-लाइसेंसिंग का सीधा मतलब है कि अब कोई भी कंपनी या व्यक्ति सरकार से विशेष अनुमति और भुगतान के बिना इस बैंड का उपयोग कर सकता है। इसका इस्तेमाल वाई-फाई हॉटस्पॉट, स्मार्ट डिवाइस और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) नेटवर्क स्थापित करने में आसानी से किया जा सकेगा। यह कदम भारत को उन 100 से अधिक देशों की लीग में शामिल करता है जिन्होंने पहले ही 6 GHz बैंड को डी-लाइसेंस कर दिया है।
हाई-स्पीड इंटरनेट का 'सुपरहाइवे':
सरकार के इस दूरदर्शी फैसले से पूरे समाज में बिना किसी बाधा के हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाना संभव हो सकेगा। इससे टेलीकॉम ऑपरेटरों को अपनी सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच बढ़ाने में मदद मिलेगी, वहीं टेलीकॉम उपकरण बनाने वाली कंपनियों के लिए भी यह एक बड़ा अवसर लेकर आएगा। नए बैंड का मतलब है नए और उन्नत उपकरणों की मांग में वृद्धि।
टेलीकॉम कंपनियों के लिए 'विन-विन' सिचुएशन:
यह कदम दूरसंचार उपकरण बनाने वाली कंपनियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। डी-लाइसेंसिंग से उनके लिए नए उत्पादों और तकनीकों को विकसित करने का मार्ग प्रशस्त होगा। नए बैंड के लिए नए उपकरणों की आवश्यकता होगी, जिससे इस क्षेत्र में नवाचार और विकास को बढ़ावा मिलेगा।
संक्षेप में कहें तो, 5925 – 6425 MHz बैंड की डी-लाइसेंसिंग भारत के टेलीकॉम सेक्टर के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है। यह न केवल हाई-स्पीड इंटरनेट की पहुंच को बढ़ाएगा बल्कि AI, रोबोटिक्स और इमर्सिव टेक्नोलॉजी जैसे भविष्य के अनुप्रयोगों के लिए भी एक मजबूत नींव तैयार करेगा।
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