'रोड ऑफ सिंदूर' का खुलासा: पाक हैकर्स के 15 लाख साइबर हमलों में भारत की अभेद्यता उजागर

'रोड ऑफ सिंदूर' का खुलासा: पाक हैकर्स के 15 लाख साइबर हमलों में भारत की अभेद्यता उजागर

पहलगाम आतंकी हमले के बाद, पाकिस्तान से जुड़े साइबर समूहों ने भारत के महत्वपूर्ण सरकारी वेबसाइटों और आईटी बुनियादी ढांचे पर 15 लाख से अधिक साइबर हमले किए। हालांकि, हमारी मजबूत साइबर सुरक्षा के कारण, इनमें से केवल 150 हमले ही सफलतापूर्वक भेद पाए। महाराष्ट्र साइबर विभाग के अधिकारियों ने सोमवार, 12 मई को इस महत्वपूर्ण जानकारी का खुलासा किया। अधिकारियों ने यह भी बताया कि इन साइबर हमलों को अंजाम देने वाले सात उन्नत लगातार खतरे (Advanced Persistent Threat - APT) समूहों की पहचान कर ली गई है। यह विस्तृत रिपोर्ट 'रोड ऑफ सिंदूर' नामक एक व्यापक जांच पर आधारित है, जो पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू की गई थी।


अधिकारियों के अनुसार, भले ही भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव को कम करने पर सहमति बन गई हो, लेकिन भारतीय सरकारी वेबसाइटें अभी भी पाकिस्तान के साथ-साथ बांग्लादेश, इंडोनेशिया, मोरक्को और मध्य-पूर्वी देशों से लगातार साइबर हमलों का सामना कर रही हैं।


पत्रकारों को संबोधित करते हुए, महाराष्ट्र साइबर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने उन निराधार अफवाहों का खंडन किया जिनमें छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे, विमानन प्रणालियों, नगरपालिका डेटा और भारत के चुनाव आयोग की वेबसाइट से डेटा चोरी होने का दावा किया गया था। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, "जांच में यह सामने आया कि भारत और पाकिस्तान के बीच शत्रुता कम होने के बाद साइबर हमलों में कुछ कमी जरूर आई, लेकिन ये पूरी तरह से रुके नहीं हैं। अभी भी पाकिस्तान, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, मोरक्को और मध्य पूर्व के देशों से साइबर हमले जारी हैं।"


'रोड ऑफ सिंदूर' रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष:


महाराष्ट्र साइबर विभाग द्वारा जारी 'रोड ऑफ सिंदूर' नामक विस्तृत रिपोर्ट में इन साइबर हमलों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है। यह रिपोर्ट राज्य के डीजीपी और खुफिया विभाग सहित सभी प्रमुख कानूनी एजेंसियों को सौंपी गई है। महाराष्ट्र साइबर के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक यशस्वी यादव ने बताया कि रिपोर्ट के अनुसार, ये साइबर हमले मुख्य रूप से पाकिस्तान, बांग्लादेश, मध्य पूर्व और इंडोनेशिया से संचालित किए जा रहे थे। हमलावरों ने विभिन्न तकनीकों का इस्तेमाल किया, जिनमें दुर्भावनापूर्ण सॉफ़्टवेयर (मालवेयर) अभियान, डिस्ट्रीब्यूटेड डिनायल-ऑफ-सर्विस (DDoS) हमले, जीपीएस स्पूफिंग और भारतीय वेबसाइटों की विकृति (डिफेसमेंट) शामिल थी।


यादव ने जोर देकर कहा, "भारत के महत्वपूर्ण आईटी बुनियादी ढांचे पर हुए इन हमलों को काफी हद तक नाकाम कर दिया गया है। कई बड़े हमलों को समय रहते रोक लिया गया, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा पर एक बड़ा संकट टल गया।"


इन हमलों के पीछे पहचाने गए सात प्रमुख एडवांस्ड पर्सिस्टेंट थ्रेट (APT) समूहों में एपीटी 36 (पाकिस्तान से संचालित), पाकिस्तान साइबर फोर्स, टीम इनसेन पीके, मिस्टीरियस बांग्लादेश, इंडो हैक्स सेक, साइबर ग्रुप होक्स 1337 और नेशनल साइबर क्रू शामिल हैं।


यादव ने आगे बताया कि इन समूहों ने भारतीय बुनियादी ढांचे पर कुल 15 लाख लक्षित साइबर हमले किए। इन हमलों में से केवल 150 ही सफल हो पाए, जिनमें कुतगांव बदतापुर नगर परिषद की वेबसाइट को विकृत करना शामिल था। हैकर्स ने छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (CSMIA) के साथ-साथ दूरसंचार कंपनियों से भी डेटा चुराने का दावा किया था, जिनमें से कुछ डेटा कथित तौर पर डार्कनेट पर भी देखे गए थे। इसके अतिरिक्त, जालंधर के डिफेंस नर्सिंग कॉलेज की वेबसाइट को भी हैक करके विकृत कर दिया गया था। कुछ दूरसंचार कंपनियों का डेटा भी हैकर्स के हाथ लगने की आशंका जताई गई है।


'रोड ऑफ सिंदूर' रिपोर्ट भारत की साइबर सुरक्षा की मजबूत नींव और पाकिस्तानी हैकर्स के नापाक मंसूबों को विफल करने की क्षमता को उजागर करती है। 15 लाख हमलों में से केवल 150 का सफल होना हमारी डिजिटल सीमाओं की प्रभावी सुरक्षा का प्रमाण है।

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